ग्राम प्रधानों ने अपने स्तर से एक कमरा एवं सामने टीन शेड डालकर भवन बनाया। लेकिन अभी तक उसमें किसी भी दरोगा या पुलिस कर्मी की तैनाती नहीं हुई। दिन में कभी भी गश्त की पुलिस बैठ जाती है। ज्यादातर पुलिस चौकी सहायता केन्द्र पर ताला लटका रहता है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि माछरा बस अड्डे की चौकी पर पुलिस तैनात होती तो शायद वारदात नहीं होती।
छह किमी तक पीछा, मेरठ से सूचना
सरेशाम 17.88 लाख रुपये लूट की जानकारी पर पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। पीड़ित अंकित मित्तल से थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच ने पूछताछ की। पीड़ित अंकित ने बताया कि करीब छह किमी तक बदमाशों ने पीछा किया। रास्ते में कई जगह रोकने का प्रयास हुआ। अंत में पुलिस चौकी के पास बदमाशों ने उसकी बाइक रोक ली और बैग ले गए। मुनीम से बाइक नहीं छीनी और मोबाइल भी नहीं लिया। मुनीम हसनपुर गांव में अपने दोस्त को बुलाकर लाया। मेरठ में आकर व्यापारी प्रवीण वशिष्ठ को लूट की सूचना दी। तब जाकर किठौर थाना पुलिस को जानकारी मिली कि लूट हो गई। जबकि अमूमन लूट की घटना होने पर पुलिस को सूचना दी जाती है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पुलिस का मानना है कि वारदात में कुछ तो गड़बड़ है। व्यापारी ने बताया कि मुनीम उनके यहां पर पिछले 6 माह से नौकरी कर रहा है, उसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।
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