महामंडलेश्वर राजेंद्र स्वरूप की अपहरण के बाद हत्या का राज शुक्रवार को और गहरा गया। दो आरोपियों की गिरफ्तारी होने के बावजूद पुलिस दूसरे दिन भी खुलासा नहीं कर सकी।
पुलिस का दावा कि पकड़े गए दोनों आरोपी महामंडलेश्वर को अगवा कराने में शामिल थे, लेकिन हत्या करने वाले आरोपी दूसरे हैं। जिनकी गिरफ्तारी के बाद ही गुत्थी सुलझेगी कि मर्डर क्यों हुआ और किसने कराया।
महामंडलेश्वर का शव अपहरण के तीसरे दिन बृहस्पतिवार तड़के छह बजे मवाना के नंगला गोसाई के जंगल में मिला था। पुलिस ने दो आरोपी धीरज गुर्जर निवासी फूलबाग कॉलोनी और वीशू अग्रवाल निवासी पांडव नगर को गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस ने खुलासा किया था कि महामंडलेश्वर की अपहरण के बाद हत्या में दोनों आरोपी शामिल हैं। दोनों आरोपियों के साथी दर्शन निवासी साधारणपुर इंचौली, संजय और राणा निवासी गंगानगर भी साथ थे।
बृहस्पतिवार रात भर पुलिस ने दोनों आरोपियों से पूछताछ की, जिसमें खुलासा हुआ कि वह सिर्फ अपहरण कराने में साथ थे। हत्या तो दर्शन, संजय और राणा ने की है। पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपियों का कहना है कि महामंडलेश्वर का अपहरण 25 लाख रुपये की खातिर किया गया था।
अपहरण के बाद महामंडलेश्वर की हत्या क्यों की गई, इसकी उनको जानकारी नहीं है। हत्या का कारण स्पष्ट न होने पर राज गहरा गया। सवाल उठता है कि अगर पैसे की खातिर अपहरण हुआ था तो हत्या क्यों की गई।
धीरज और वीशू भागे नहीं थे
महामंडलेश्वर का अपहरण करने के लिए रैकी धीरज और वीशू ने की, इस बात को दोनों आरोपियों ने स्वीकार भी कर लिया। ऑल्टो कार में महामंडलेश्वर को डालते समय धीरज और वीशू मौके पर मौजूद थे। जबकि दर्शन, संजय और राणा महामंडलेश्वर को कार से मवाना के नंगला गोसाई गांव के जंगल में लेकर गए थे। जहां पर उनकी निर्मम हत्या हुई।
ड्रामा करने में फंसा था धीरज
अपहरण के दौरान धीरज महामंडलेश्वर को गुरुजी-गुरुजी कहते हुए अपहरणकर्ताओं की कार के पीछे पैदल भी भागा था। इसी दौरान एक अपहरणकर्ता का मोबाइल अपहरण के दौरान गिर गया था। जिसको धीरज ने उठा लिया था।
स्थानीय लोगों ने उस मोबाइल के बारे में धीरज से पूछा तो उसने फोन नाले में फेंकने की बात कही। जिस पर लोगों को उस पर शक हो गया था कि उसने मोबाइल नाले में क्यों फेंका। अपहरण के बाद धीरज और वीशू ने ड्रामा भी किया। जिस पर लोगों की शिकायत पर पुलिस ने दोनों से पूछताछ की। तब जाकर मामला स्पष्ट हुआ।
गुरूजी ट्यूबवेल के कुएं में गिर गए ...
दर्शन को पुलिस ने मुख्य आरोपी बताया है। अपहरण के बाद वीशू ने दर्शन के मोबाइल फोन पर कॉल की और गुरुजी के बारे में जानकारी ली। दर्शन ने बताया कि महामंडलेश्वर उनके चुंगल से छूटकर भागा और ट्यूबवेल के कुएं में गिर गया।
वीशू ने उनको कुएं से निकालने की बात कही। बड़ा सवाल यही है कि जब दर्शन और उसके साथियों ने महामंडलेश्वर को मशक्कत के बाद कुएं से निकाला और मामला अपहरण कर फिरौती मांगने तक सीमित था तो फिर कुएं से निकालते ही महामंडलेश्वर की हत्या क्यों कर दी गई।