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बाउंसर, जूनियर डाक्टरों ने तीमारदारों को पीटा

Tue, 07 Mar 2017 02:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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मेडिकल कॉलेज में मरीज को भर्ती कराने पहुंचे परिजनों को जूनियर डॉक्टर और बाउंसरों ने लाठी डंडों से जमकर पीटा। महिला और बच्चों को भी नहीं छोड़ा। सभी को जमीन पर गिराकर डंडों और लोहे की रॉड से हमला किया।
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गांव वेट थाना सिंभावली (हापुड़) निवासी तोहिर पत्नी वाजिद को सोमवार को ब्रेन हैमरेज हो गया था। दोपहर करीब 3 बजे वाजिद अपने बेटे शाहिद, भतीजे शकील अहमद और अन्य के साथ तोहिर को लेकर मेडिकल कॉलेज की न्यू इमरजेंसी में पहुंचा। जहां पर चिकित्सकों ने मरीज को देखकर हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया। इसपर परिजनों ने कहा कि हमारी आर्थिक हालत सही नहीं है, आप उन्हें यहीं पर भर्ती कर लीजिये। ऐसे में जूनियर डॉक्टर शाहिद पर चिल्ला पड़े और कहा कि आप लोग बताओगे कि कैसे मरीज का इलाज होना है। इस बीच बाउंसरों ने मरीज और तीमारदारों को धक्के मारने शुरू कर दिया। जिस पर शाहिद व अन्य परिजनों विरोध किया तो बाउंसर और जूनियर डॉक्टरों ने उन्हें लाठी-डंडों से पीटना शुरू कर दिया। इस दौरान शाहिद को सबसे ज्यादा चोट आई,  जिसके नाक और सिर से खून बह रहा था। इसके अलावा करीब आधा दर्जन लोग घायल हुए।

ईएमओ ने बचाया
हंगामे की सूचना पर पहुंचे ईएमओ डॉ. अजीत चौधरी ने किसी तरह मरीज और उसके तीमारदारों को बचाया। इस बीच परिजन मेडिकल थाने पहुंच गए और मामले की शिकायत की। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक सब फरार हो चुके थे। परिजनों ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज निकाल लीजिये सब पता चल जाएगा।
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बाउंसरों की गुंडागर्दी
मेडिकल कॉलेज में अवैध तरीके से रखे गए बाउंसरों की गुंडागर्दी काफी बढ़ गई है। कॉलेज प्रशासन ने हंगामे की स्थिति में लोगों को कंट्रोल करने के नाम पर इनको रखा था। खास बात यह है कि निजी तौर पर रखे गए बाउंसरों की कोई स्वीकृति न जिला प्रशासन से ली गई है और न ही शासन से। ऐसे में कॉलेज किस मद से इन बाउंसरों को भुगतान कर रहा है यह भी जांच का विषय है। उधर, बाउंसर कुछ चिकित्सकों के लिए निजी सिक्योरिटी गार्ड का काम कर रहे हैं। जिनके संरक्षण पर अवैध सिक्योरिटी का कारोबार चल रहा है।

नहीं पहुंचा कोई सीनियर चिकित्सक
इमरजेंसी के अंदर इतना बड़ा बवाल हो गया, लेकिन मेडिकल कॉलेज का कोई सीनियर अधिकारी एवं चिकित्सक मौके पर नहीं पहुंचा। जिससे पता चलता है कि कालेज में मरीजों की कितनी फिक्र है। हंगामे के दौरान इमरजेंसी के बाहर ब्रेन हैमरेज से पीड़ित महिला काफी देरी तक तड़पती रही। करीब तीन घंटे बाद महिला को भर्ती कराया गया।
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