जूनियर डॉक्टरों की अराजकता के सामने सरकारी चिकित्सा चरमरा गई। जूनियर डॉक्टरों के हाथों में आला के बजाय हॉकी डंडे तो कर्मचारियों के हाथों में पत्थर थे। पुलिस अधिकारी, प्राचार्य, सीएमओ और सीनियर डॉक्टरों ने उनको समझाने का प्रयास किया, लेकिन जूनियर डॉक्टरों ने अभद्रता कर उनको वहा से भगा दिया। देर रात तक मेडिकल कैंपस में अराजकता का माहौल बना हुआ था।
विवाद मेडिकल कैंपस में बने स्टेडियम को लेकर है। जूनियर डॉक्टर दावा करते है कि स्टेडियम सरकारी नहीं, बल्कि उन्होंने अपना पैसा लगाकर उसे अच्छा बनाया है। जबकि कर्मचारियों का कहना है कि मेडिकल कैंपस में स्टेडियम बना हुआ है। जिसमें कर्मचारियों के बच्चे, महिलाएं भी घूमने या खेलने जा सकती हैं।
मंगलवार को इसी बात पर जूनियर डॉक्टर और कर्मचारी आमने-सामने आए। हालत यह थे कि कर्मचारियों ने दो जूनियर डॉक्टरों की पिटाई कर दी। जिस पर जूनियर डॉक्टरों ने कर्मचारी और उनके परिवार को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा।
आरोप है कि जूनियर डॉक्टरों ने कर्मचारियों के घर में घुसकर तोड़फोड़ और उनकी गाड़ियां तक तोड़ीं। एक तरफ जूनियर डॉक्टर हॉकी, डंडे लेकर गालीगलौज कर रहे थे तो दूसरी
तरफ कर्मचारी हाथों में ईंट पत्थर लेकर डॉक्टरों से अभद्रता कर रहे थे।
हालात ऐसे थे कि दोनों एक दूसरे की जान के दुश्मन बने थे। पुलिस-प्रशासन और मेडिकल कॉलेज के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अफसरों ने जूनियर डॉक्टरों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं थे।
मरीज को उनके हाल पर छोड़ा
जूनियर डॉक्टरों और कर्मचारियों में खूनी संघर्ष होने की गूंज लखनऊ तक पहुंच गई। जूनियर डॉक्टर और कर्मचारी अस्पताल में भर्ती मरीजों को छोड़कर बवाल में नजर आए। अस्पताल में गिने-चुने डॉक्टर और कर्मचारी थे, जिससे मरीजों को इलाज कराया गया। इमरजेंसी के अलावा दूसरे विभागों में रात में न डॉक्टर दिखे और कर्मचारी।