यह शरारती युवक हर बार रेलवे स्टेशनों पर धमाके की धमकी देकर मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर लेता है। खास बात यह है कि दो मामलों में उसने एक ही नंबर का प्रयोग किया, लेकिन लचर खुफिया तंत्र उसे ढूंढ तक नहीं पाया। सिटी स्टेशन पर ब्लास्ट की सूचना देने वाले इस सिरफिरे ने बीते साल भी इसी नंबर से कानपुर सेंट्रल स्टेशन को उड़ाने की धमकी दी थी, लेकिन हत्थे नहीं चढ़ा।
विगत 15 जनवरी की दोपहर 3:15 बजे एसओ जीआरपी अशोक कुमार के सरकारी नंबर पर एक अज्ञात युवक ने कॉल कर सनसनी फैला दी थी। धमकी दी थी कि प्लेटफार्म नंबर दो पर शाम ठीक चार बजे बम फटेगा। रोक सको तो रोक लो। इस धमकी से ऐसा हड़कंप मचा था कि जीआरपी, आरपीएफ और सिविल पुलिस द्वारा कई घंटे प्लेटफार्म नंबर दो के अलावा सभी प्लेटफार्म, सर्कुलेटिंग एरिया, पार्किंग, पार्सल, कैंटीन आदि का चप्पा-चप्पा छान मारा गया, लेकिन कोई भी विस्फोटक पदार्थ नहीं मिला। बम की सूचना झूठी पाई गई थी।
रविवार को एसओ जीआरपी ने बताया कि इसी फोन नंबर से इस सिरफिरे ने गत वर्ष 19 दिसंबर को कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर भी कॉल करते हुए स्टेशन को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। फोन करने वाले युवक के खिलाफ दोनों जीआरपी थानों ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। ब्लास्ट की झूठी सूचना के बाद से उक्त मोबाइल फोन स्विच ऑफ आ रहा है। युवक की तलाश की जा रही है।
धमकी के पीछे मकसद क्या
सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले के बाद मेरठ में रेलवे स्टेशन, डाकघर और भीड़भाड़ वाले इलाकों के अलावा पुलिस के अफसरों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। जिसके बाद एसएसपी ऑफिस और आवास पर बाकायदा मोर्चा तक बना लिया गया था। इसके बाद समय-समय पर कभी फोन कॉल तो पत्र के माध्यम से सरकारी उपक्रमों को बम से उड़ाने की धमकी कई बार मिली। लेकिन पुलिस और खुफिया तंत्र इसकी तह तक नहीं पहुंच पाया। हापुड़ रोड स्थित एक हॉस्पिटल में बम होने की सूचना पर हॉस्पिटल आनन-फानन में खाली कराया गया था।
करीब दो घंटे तक हापुड़ रोड बंद कर हॉस्पिटल सर्च करने के बाद कुछ हाथ नहीं लगा था। इसी तरह रेलवे रोड चौराहे स्थित अग्रसेन भवन में इस तरह की धमकी का एक आतंकी संगठन के नाम से पत्र फेंका गया था। गंभीर सवाल है कि धमकी के बाद चेकिंग में कुछ न निकलने पर पुलिस अफसर भी शांत बैठ जाते हैं। कभी कायदे से इस तरह की धमकियों के पीछे के मकसद को समझने की कोशिश तक नहीं की जाती।