जानी के सविता नर्सिंग होम का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। तीन सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सीएमओ की तरफ से लाइसेंस निरस्त करते हुए कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि बाकी अवैध तरीके से संचालित नर्सिंग होम पर कार्रवाई करने पर स्वास्थ्य विभाग ने चुप्पी साध ली है। उधर, अभी इस नर्सिंग होम के खिलाफ प्रशासन की तरफ से जांच की जा रही है। वहां से जांच होने के बाद ही कोई कानूनी कार्रवाई होने की उम्मीद है।
हालांकि इतने बड़े अपराध के लिए सीएमओ की तरफ से चिकित्सक के खिलाफ मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को लिखा जाना चाहिए था। लेकिन विभाग कार्रवाई के नाम पर गेंद जिला प्रशासन के पाले में डालनेे की कोशिश में लगा है। ठोस कार्रवाई न करने के पीछे स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि यूपी में कोई नर्सिंग होम एक्ट नहीं है। विभाग के पास सिर्फ पंजीकरण करने का अधिकार है और उसी को निरस्त कर दिया गया है।
जबकि नर्सिंग होम संचालक ने साल 2010 में स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण कराया था। उसके बाद उसने नवीनीकरण नहीं कराया। हालांकि जांच टीम को साल 2014 का नवीनीकरण दिखाया गया था, लेकिन उस पर सीएमओ के हस्ताक्षर नहीं थे। ऐसी दशा में पंजीकरण अपने आप में ही निरस्त माना जाएगा। अब विभाग तर्क रख रहा है कि उसका पंजीकरण निरस्त करते हुए कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
एसीएमओ प्रशासन डॉ. धीरेंद्र कुमार का कहना है कि पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है। बाकी की कार्रवाई जिला प्रशासन द्वारा की जानी है। लेकिन इतना साफ है कि नर्सिंग होम की हालत बेहद खराब थी।
बाकी पर चुप्पी क्यों
जानी का नर्सिंग होम छोटा सा उदाहरण है। जिले में बड़ी संख्या में अस्पताल और नर्सिंग होम संचालित हैं, जो दो से चार कमरों की जगह पर संचालित हो रहे हैं। न उनका नक्शा पास है और न ही उनके पास पर्याप्त लाइफ सपोर्ट सिस्टम उपलब्ध हैं। लेकिन फिर भी उन्हें सीएमओ से पंजीकरण प्राप्त है। जबकि पंजीकरण की शर्तों में नक्शा डेवलपमेंट अथॉरिटी से अप्रूव होना चाहिये। विभाग का तरफ से तर्क रहा है कि अधिकांश नर्सिंग होम का काफी पहले से पंजीकरण हो चुका है।
अगर कोई आवासीय क्षेत्र में संचालित हो रहा है तो उसके खिलाफ संबंधित अथॉरिटी को कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि अगर किसी का गलत तरीके से पंजीकरण हुआ है तो स्वास्थ्य विभाग ने उसे कितनी बार नोटिस जारी किया। उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिये क्यों नहीं लिखा गया। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग सिर्फ आंखें बंद कर पंजीकरण करने में लगा है। हर किसी को पंजीकरण दे दिया जा रहा है। चाहे उसके पास प्रशिक्षित स्टाफ, पर्याप्त जगह व उपकरण हो या न हों।
यह है मामला
जानी स्थित सविता नर्सिंग होम की नर्सरी में आग लगने से विगत बुधवार रात 11 बजे खिर्वा गांव निवासी सलीम का चार माह का बेटा अलीशान और कुराली गांव निवासी सहदेव की एक दिन की बेटी झुलस गई थी। नर्सिंग होम का स्टाफ सोया हुआ था। आसपास के लोगों ने शोर मचाया, तब जाकर स्टाफ की नींद टूटी। इसके बाद दोनों मासूमों को आग से निकालकर शहर के सिरोही नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। इनमें आलीशान ने बृहस्पतिवार सुबह करीब पांच बजे इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।