न माल बरामद, न कोई ठोस सुबूत और फिर भी दो चर्चित हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया। अभिषेक मर्डर केस का खुलासा कर भले ही पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही हो। लेकिन पीड़ित परिवार ने इसको फर्जी बताया है। गुटखा व्यापारी सुशील वर्मा का कहना है कि वह बेटे की हत्या के चश्मदीद गवाह हैं। वह बेटे के खून का आरोप बेकसूरों पर नहीं लगाएंगे।
ब्रह्मपुरी कांड के खुलासे की जानकारी पर अभिषेक के परिजनों का गुस्सा फिर फूट पड़ा। सुशील वर्मा ने बताया कि दो फरवरी की वह शाम आज भी उन्हें अच्छी तरह से याद है। चार बदमाश गोदाम में आए थे और पांच-सात मिनट भी रुके। पड़ोसी उमेश अग्रवाल की दुकान के पास अभिषेक ने एक बदमाश को पकड़ा था। अभिषेक के साथ मेेरे अलावा उमेश अग्रवाल, अखिल, रोहित और सोनू भी थे। बदमाशों ने गोलियां चलाई, जिसमें अभिषेक की मौत हुई। जबकि बाकी लोग घायल हुए थे। चश्मदीद पांचों लोगों ने बदमाशों को अच्छी तरह से देखा था। बदमाश दो सोने की चेन और अभिषेक का मोबाइल लूटकर ले गए थे। पुलिस ने खुलासे में सोने की चेन व पैसा बरामद नहीं किया।
बरामद फोन 22 फरवरी को मिला था
पुलिस ने खुलासे में अभिषेक से लूटा हुआ मोबाइल दिखाया है। सुशील ने बताया कि अभिषेक के मोबाइल पर उसके परिवार के लोग रोजाना कॉल करते थे। 22 फरवरी को उस मोबाइल के व्हाट्सएप से अभिषेक की डीपी हटा दी गई थी। हमने कॉल की तो वह रिसीव नहीं हुई। हमने इसकी जानकारी पुलिस को दी। जिसके बाद पुलिस ने यह मोबाइल एक युवती से बरामद किया। पुलिस ने परिजनों को बताया था कि युवती ने रास्ते से फोन और सिम मिलने की बात कही थी।
चश्मदीदों से नहीं कराई शिनाख्त
अभिषेक हत्याकांड के फर्जी खुलासे की चर्चा पुलिस के कई अधिकारियों तक है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि 11 मार्च को मतगणना होने के बाद अधिकारियों के ट्रांसफर होने तय हैं। इसको देखते हुए यह खुलासा करने की सहमति बनी। शायद यही वजह है कि पुलिस ने चश्मदीदों से आरोपियों की पहचान तक नहीं कराई। जबकि घटना के बाद से लगातार पुलिस संदिग्ध लोगों के फोटो परिजनों को दिखा रही थी। सुशील के भाई प्रवीण को पुलिस ने आरोपी दिखाए, लेकिन उसने साफ मना कर दिया।
पहले सही आरोपी पकड़ा था
सुशील वर्मा ने बताया कि वारदात के तीसरे दिन पुलिस ने एक युवक का फोटो उन्हें दिखाया था। उसको देखते ही पहचान भी लिया था। लेकिन बाद में पुलिस ने उसको क्लीन चिट देकर क्यों छोड़ा, यह बात समझ में नहीं आई। पुलिस ने दावा किया था कि जिस युवक को सुशील ने पहचाना है, उसकी लोकेशन घटनास्थल के आसपास आ रही थी। पुलिस बार-बार उनको बहकाती रही कि युवक अभी छोड़ा नहीं है। कुछ सुबूत जुटाए जा रहे हैं। युवक बाहर रहेगा तो कुछ गलती जरूर करेगा, तभी उसको पकड़ लिया जाएगा।
जब तक जिंदा हूं, याद रहेगा
सुशील वर्मा ने पुलिस के इस फर्जी खुलासे की आईजी जोन और अन्य पुलिस अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में खुलासा नहीं मानूंगा। मेरा जवान बेटा गया है। मेरा परिवार अभी तक इस गम से बाहर नहीं निकला। जब तक जिंदा हूं, तब तक कातिलों के चेहरे नहीं भूल सकता। पुलिस गलत आरोपियों को जेल भेजकर मुझे धोखा दे रही है।
मेरे परिवार को अभी खतरा
सुशील ने बताया कि पुलिस गलत आरोपियों को जेल भेज रही और सही आरोपी अभी खुलेआम घूम रहे है। जो बदमाश मेरे बेटे की हत्या और मुझको गोली मार सकते हैं तो क्या फिर वह दोबारा मेरे परिवार के साथ वारदात नहीं कर सकते। मेरे परिवार पर पुलिस की घोेर लापरवाही के चलते खतरा बना हुआ है।
सुपारी में 25 लाख, बरामद रुपया नहीं
पुलिस का दावा है कि किन्नर की हत्या में 25 लाख रुपये की सुपारी चीता गैंग ने ली थी। 27 दिसंबर को किन्नर की हत्या हुई। सवाल उठता है कि पुलिस ने आरोपियों से एक रुपया तक बरामद नहीं किया। पुलिस ने कहा कि हिस्ट्रीशीटर सारिक ने चीता गैंग को पैसा दिया था। क्योंकि वह अपने विरोधी सलमान को कमजोर करना चाह रहा था। सलमान भी हत्या के मामले में जेल में बंद है।