फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घिसौली में झगड़ा खत्म, आज मनेगी ईद

Sun, 27 Sep 2015 01:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
विज्ञापन
घिसौली गांव में बिना अनुमति धार्मिक स्थल के निर्माण और ईद पर कुर्बानी की परंपरा शुरू करने को लेकर चल रहे सांप्रदायिक विवाद का फौरी तौर पर पटाक्षेप हो गया। ग्रामीणों ने शुक्रवार को ईद नहीं मनाई थी। शनिवार को पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के साथ ही सपा विधायक गुलाम मोहम्मद ने गांव में पहुंचकर ग्रामीणों से वार्ता की। उन्होंने ग्रामीणों को समझाबुझाकर शांतिपूर्वक तरीके से ईद मनाने की अपील की। काफी समझाने के बाद लोग रविवार को ईद मनाने पर राजी हो गए। तय हुआ कि ईद की नमाज गांव की ही मस्जिद में पढ़ी जाएगी। तथा परंपरागत रूप से कुर्बानी पड़ोस के गांव मुरलीपुर में की जाएगी।
विज्ञापन


यह है विवाद
गांव के दूसरे समुदाय ने ईद पर धार्मिक स्थल का निर्माण और कुर्बानी शुरू कराने का ऐलान किया था। इसको लेकर गांव में दोनों समुदायों के लोगों ने अलग-अलग पंचायत भी की थी। जिसमें दूसरे पक्ष के ग्रामीणों ने साफ कह दिया था कि गांव में कुर्बानी की नई परंपरा शुरू नहीं होने दी जाएगी। निर्माण हुआ तो उसे तोड़ दिया जाएगा। ईद की पूर्व संध्या पर पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने थाना कंकरखेड़ा पर दोनों समुदायों को समझाने की कोशिश की। लेकिन चार घंटे से ज्यादा चली बैठक बेनतीजा रही।

और नहीं मनी ईद
सांप्रदायिक तनाव को देखते हुए शुक्रवार को गांव में भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई। लेकिन, गांव में न तो ईद की नमाज पढ़ी गई और कुर्बानी दी गई। दूसरे समुदाय के लोगों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जरूर जताया। अफसरों के पूछने पर कहा गया था कि हम पर किसी का दबाव नहीं। हम स्वेच्छा से ईद नहीं मना रहे हैं। पुलिस-प्रशासन और अन्य ग्रामीणों का कहना था कि किसी पर त्योहार न मनाने का कोई दबाव नहीं था।
विज्ञापन


अब समझाने पर माने
शनिवार को एडीएम प्रशासन दीपचंद, एसपी सिटी ओपी सिंह, सीओ दौराला डॉ. अरविंद कुमार और सपा विधायक गुलाम मोहम्मद ने गांव में पहुंचकर ग्रामीणों से ईद न मनाने का कारण पूछा। जवाब मिला कि उन पर कोई दबाव नहीं था। स्वेच्छा से ही त्योहार नहीं मनाया। ग्रामीणों ने कहा कि जब उनके धार्मिक स्थल बनाने व कुर्बानी देने से गांव में दूसरे समुदाय के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचती है तो बेहतर है कि फिर त्योहार ही न मनाया जाए। काफी समझाने के बाद ग्रामीण पुरानी परंपरा के तहत ईद मनाने के लिए राजी हो गए।
विज्ञापन


और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें