गढ़ रोड स्थित एक इंस्टीट्यूट के छात्रों ने संचालकों पर टेक्निकल कोर्स के फर्जी प्रमाण पत्र देने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। एसएसपी के निर्देश पर पुलिस ने सेंटर पर छापा डालकर संचालक समेत दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया। छात्र की तहरीर पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। सोमवार को छात्र-छात्राओं ने एसएसपी को बताया कि उन्होंने गढ़ रोड स्थित कल्याण नगर कॉलोनी में राधिका इंस्टीट्यूट ऑफ इनफॉरमेशन टेक्नॉलॉजी एंड मैनेजमेंट स्टडीज में दाखिला लिया था।
आरोप लगाया कि परीक्षा के बाद उन्हें फर्जी प्रमाण पत्र दिए गए। आरोप लगाया कि उन्होंने पहले भी शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने मामला दबा दिया। छात्रों की शिकायत पर एसएसपी ने सीओ सिविल लाइन वीएस वीर कुमार को अपने ऑफिस बुलाकर उक्त संस्थान पर कार्रवाई के निर्देश दिए। सीओ सिविल लाइन और इंस्पेक्टर नौचंदी सम्राट पैलेस स्थित संस्थान पर पहुंचे तो वहां डांस क्लास चलती मिली। मौके से कोई संदिग्ध प्रमाणपत्र नहीं मिला। इंस्पेक्टर नौचंदी के अनुसार संजय नगर निवासी छात्र अंकुश की तहरीर पर रितेश और निर्देश के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
फीस वापस मांगी तो धमकाया
छात्रों का आरोप था कि प्रवेश के समय संचालक ने इंस्टीट्यूट और इसमें संचालित कोर्स विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त होना बताया था। परीक्षाओं के बाद संस्थान ने उन्हें सिक्किम की एक यूनिवर्सिटी से जारी अंक पत्र और प्रमाण पत्र दिए। उन्होंने उक्त प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी की बात की तो पता चला कि यह प्रमाण पत्र फर्जी हैं। उन्होंने अपने स्तर से भी इनकी जांच कराई तो इंस्टीट्यूट की संबद्धता और प्रमाण पत्र फर्जी मिले। छात्रों का कहना था रितेश ने अपना इंस्टीट्यूट बदलकर सम्राट पैलेस में खोल दिया। छात्र जब वहां पहुंचे तो फीस वापस मांगने पर फर्जी केस में फंसाने की धमकी दी। बाद में संचालक ने यहां अपनी पत्नी को डांस सेंटर खुलवा दिया।
सिफारिशों का लगा तांता
नौचंदी थाने में रितेश के पहुंचते ही सिफारिशों का तांता लग गया। कुछ देर में ही रितेश और निर्देश आपस में सुलह कर मसला खत्म करने की गुहार लगाने लगे। कुछ सिफारिशी छात्रों की रकम वापस दिलाने की बात करने लगे, लेकिन सीओ ने इससे इंकार कर दिया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने की कार्यवाही शुरू की तो वादी ही नहीं मिला। काफी भागदौड़ के बाद रिपोर्ट दर्ज हो पायी।
उल्टी पड़ गई चाल
सीओ सिविल लाइन बीएस वीर कुमार ने बताया कि रितेश और निर्देश दोनों साथ मिलकर काम करते थे। रितेश संचालक था और निर्देश इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए छात्रों को लाने का काम करता था। इसके लिए वह कमीशन लेता था। करीब पांच लाख रुपये वह रितेश से ले चुका था, लेकिन अब उसकी डिमांड और बढ़ गई थी। इसी को लेकर दोनों में मनमुटाव हो गया। इसी बीच छात्रों को पता चला कि उन्हें सिक्किम की इम्स यूनिवर्सिटी के जो प्रमाणपत्र दिए गए हैं, वह फर्जी हैं। चूंकि उनका एडमिशन निर्देश के माध्यम से हुआ था, लिहाजा उन्होंने निर्देश पर अपनी फीस वापसी का दबाव बनाना शुरू कर दिया। चूंकि रितेश निर्देश की डिमांड पूरी नही कर रहा था इसलिए निर्देश ने छात्रों को भड़काना शुरू कर दिया। वही छात्रों को एसएसपी दफ्तर शिकायत कराने ले गया। लेकिन उसे शायद नहीं पता था कि उसकी सच्चाई भी सामने आ जाएगी।
जांच के बाद होगी आरोपों की पुष्टि
सीओ सिविल लाइन के अनुसार छात्रों ने प्रमाण पत्र फर्जी होने के आरोप लगाए हैं। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। विवेचना के बाद ही छात्राें के आरोपों की पुष्टि होगी। प्रमाण पत्रों की जांच के बाद ही प्रमाण पत्रों की सत्यता का पता चलेगा।