स्वच्छ भारत मिशन के तहत मोरना गांव में बनाए जा रहे शौचालयों में घोटाले का खुलासा हुआ है। ग्राम प्रधान और संबंधित विभाग के अधिकारियों ने मिलीभगत कर मृतकों और गांव छोड़कर चले गए कुछ लोगों के नाम पर शौचालय बनवा दिए। कई लोग ऐसे भी हैं जिनके नाम पर सूची में दो शौचालय दर्ज हैं। वहीं अधिकारी कंप्यूटर की गलती से नाम गलत छपने की बात कह रहे हैं।
भावनपुर थाना क्षेत्र के गांव मोरना में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 232 शौचालय बनवाने का काम चल रहा है। इन शौचालयों को निर्माण के लिए धनराशि सेक्रेेटरी के खाते में आती है। इसके माध्यम से ही प्रधान गांव में शौचालयों का निर्माण करवाते हैं। मोरना ग्राम प्रधान शहजाद ने गांव में शौचालय के लिए सर्वे कराया था। सर्वे के बाद जब दावेदारों की लिस्ट निकली तो उसमें कई ऐसे नाम सामने आए जिनकी काफी पहले मौत हो चुकी है। वहीं कुछ ऐसे भी थे जो काफी समय पहले गांव छोड़कर जा चुके हैं। दूसरी तरफ गांव में कई परिवार ऐसे हैं जो शौचालय बनवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। इसकी फर्जीवाड़े की शिकायत बजरंग दल के बूथ अध्यक्ष मोहित कांबोज, सह संयोजक निशांत शर्मा, सदस्य राजकुमार ने डीएम समीर वर्मा से की है। वहीं इस संबंध में सेक्रेटरी भोपाल सिंह ने कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया।
इनकी लोगों की हो चुकी है मौत
मोरना निवासी नरेश पुत्र अतर सिंह, नत्थू पुत्र बंता सिंह, रामबल पुत्र रिशाल, रामेश्वर पुत्र द्वारका, सत्यप्रकाश पुत्र शेरा की काफी समय पहले मौत हो चुकी है। प्रधान ने इन सबको दावेदार बताते हुए शौचालय बनवा दिए।
ये लोग जा चुके गांव छोड़कर
मोरना निवासी महकार पुत्र राजेश, गुलफम पुत्र जमील, अश्वनी पुत्र ब़ुद्ध प्रकाश आदि शामिल है। यह सभी अपने परिवार के साथ बाहर शहरों में रहते हैं।
नाम में किया गया खेल
शौचालयों को बनाने के मामले में नाम की स्पेलिंग में भी खेल किया गया है। इसी खेल के चलते अर्जुन पुत्र किरपाल के नाम पर दो शौचालय, भागचंद पुत्र हुकुम के नाम पर दो शौचालय, गंगाशरण पुत्र नत्थू, इस्लाम पुत्र बुंदू और सतेंद्र पुत्र मांगेराम के नाम पर भी दो शौचालय लिस्ट में दिखाए गए हैं। इनके नाम की स्पेलिंग में बदलाव किया गया है।