शहर में विभिन्न विश्वविद्यालय के स्टडी सेंटर बनाकर स्नातक से पीएचडी तक की डिग्री छात्रों को दी गई। नौकरी करने पहुंचे छात्रों की जांच में डिग्री फर्जी मिली तो हकीकत सामने आई। इन डिग्री के नाम पर युवाओं से करोड़ों रुपये की ठगी की गई है। मामला एसएसपी के संज्ञान में आने पर पुलिस जांच शुरू हो गई है।
मेडिकल थाना क्षेत्र के जागृति विहार निवासी निर्देश कुमार ने एसएसपी से शिकायत की है कि रतीश और उसकी पत्नी से 2010 में उसका परिचय हुआ था। दोनों कई विवि का स्टडी सेंटर नौचंदी क्षेत्र में गढ़ रोड पर चला रहे हैं। लगभग दस वर्षों से यह सेंटर चल रहा है। इस पर निर्देश ने पीएचडी शिक्षा शास्त्र में एडमिशन ले लिया। साथ ही अपनी पत्नी को एमए समाज शास्त्र, भाई पुष्पेंद्र को एमए इतिहास और भांजे आशीष को पॉलिटेक्निक में प्रवेश दिला दिया।
इसके अतिरिक्त अपने दोस्त विकास और उसकी पत्नी को भी स्नातक में दाखिला दिलाया। निर्देश का आरोप है कि जब वह सिक्किम स्थित एक यूनिवर्सिटी में जॉब के लिए पहुंचा तो उसके प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। स्टडी सेंटर की संबद्घता भी फर्जी मिली। उसने रतीश से डिग्री फर्जी होने की बात कहते हुए फीस के रूप में दी गई लाखों की रकम वापस मांगी तो वहां मौजूद स्टाफ ने उसे जान की धमकी दी। आरोप है कि कई सौ छात्रों से करोड़ाें रुपये की ठगी की जा चुकी है। मामला संज्ञान में आने पर एसएसपी ने जांच के आदेश दिए हैं।
दो लाख रुपये में पीएचडी की डिग्री
निर्देश के अनुसार दो लाख रुपये में पीएचडी की डिग्री, 80 हजार से एक लाख में पॉलिटेक्निक डिप्लोमा, 1 लाख बीस हजार से डेढ़ लाख में एमबीए की डिग्री दी जा रही थी। स्टडी सेंटर पर पीएचडी को छोड़कर सभी कोर्स की परीक्षा कराई जाती थी। पीएचडी डिग्री दो साल में दी जाती थी।