प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में आवास मुहैया कराने के लिए हुए सर्वे में खुद को बेघर बताने वाले दस हजार लोगों के पास अपने आवास मिले हैं। ऐसे आवेदनों को अब अपात्र मान लिया गया है। इस पर अब बाकी लोगों के लिए योजना पर काम अब शुरू होगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के लिए अलग-अलग कार्यरत है। समाजवादी आवास योजना की तर्ज पर इस योजना में काम किया जाएगा। जिन लोगों के पास मकान बनाने के लिए जमीन है, उसे एक कमरे का आवास बनाने के लिए एक लाख बीस हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा। सामाजिक, आर्थिक एवं जातिगत आधारित गणना 2011 से इस योजना के लिए आंकड़े लिए गए थे। इसमें देखा गया था कि ग्रामीण क्षेत्र में इस सर्वे के मुताबिक कितने लोग आवासहीन हैं, जो इस योजना में आते हैं। 12 हजार लोगों की सूची केंद्र सरकार ने चयन कर स्थानीय प्रशासन को भेजी।
सत्यापन में खुली कहानी
इन 12 हजार लोगों का सत्यापन कराया गया तो सच्चाई सामने आ गई। सत्यापन में दस हजार से ज्यादा लोगों के पास आवास मिले हैं। यानी इन लोगों ने गलत तरीके से सर्वे में खुद को आवासहीन बताया था। हालांकि सर्वे वर्ष 2011 में हुआ था। ऐसे में अधिकारी यह भी मान रहे हैं कि हो सकता है तब से अब तक आवास बना लिए गए हों, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में आवास बनाने का गणित किसी के गले नहीं उतर रहा है। अब बाकी 1900 लोगों की सूची फाइनल कर दी गई है। इस बाबत प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है।