पीड़ित युवक जिसके साथ लूट की गई।
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एक रिटायर इंस्पेक्टर ने खुद को कॉलोनाइजर बताकर डिप्टी एसपी के अधिवक्ता पुत्र से प्लॉट का सौदा कर 31 लाख रुपये ले लिए। साढ़े तीन साल बाद भी बैनामा न होने पर जब अधिवक्ता को शक हुआ तो पता चला कि रिटायर इंस्पेक्टर तो इस प्लॉट का मालिक ही नहीं है। जिसने धोखाधड़ी कर किसी दूसरे के प्लॉट का सौदा किया था। पीड़ित अधिवक्ता ने गंगानगर थाने पर रिटायर इंस्पेक्टर और उसके पुत्र के खिलाफ धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
पुलिस के अनुसार गंगानगर जीपी पॉकेट निवासी रमेश चंद गुर्जर नोएडा स्थित पुलिस कंट्रोल रूम में डिप्टी एसपी के पद पर तैनात हैं। उनके पुत्र शक्ति सिंह कड़कड़डूमा कोर्ट दिल्ली में वकालत करते हैं। शक्ति सिंह ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि शास्त्रीनगर एफ ब्लॉक निवासी यूपी पुलिस से रिटायर इंस्पेक्टर वीरेंद्र पाल उनके दूर के रिश्तेदार हैं। करीब साढ़े तीन साल पहले वीरेंद्र पाल और उनके दो बेटों ओम और अंशुल ने कहा था कि वे परतापुर के घाट गांव में कॉलोनी काट रहे हैं।
जिसमें 700 गज का प्लॉट बेचने की एवज में उनसे 31 लाख रुपये लिए थे। शक्ति सिंह के अनुसार कुछ दिनों बाद उन्होंने वीरेंद्र पाल से बैनामा कराने को कहा तो उन्होंने प्लॉट के कागज खोने का बहाना बनाया। करीब छह माह बाद फिर बैनामा कराने को कहा तो टालमटोल कर दी गई। बाद में पता चला कि इस प्लॉट का मालिक कोई और है। 31 लाख की रकम वापस मांगने पर जान से मारने की धमकी दे दी गई। शक्ति सिंह ने इसकी शिकायत एसएसपी से की। जिसके बाद एसएसपी के आदेश पर रिटायर इंस्पेक्टर वीरेंद्र पाल सिंह और उसके पुत्र अंशुल कसाना के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई।