शास्त्रीनगर के सनसनीखेज ड्रग्स स्कैंडल को उजागर करने वाली बहादुर बेटी की हिम्मत पुलिस के मंसूबे के आगे पस्त हो गई है। बेटियों को ड्रग्स के दलदल में धकेलने वाले घिनौने गिरोह की तह तक जाने के बजाय पुलिस अफसर उनके बचाव में उतर आए हैं।
आरोपियों का जुड़ाव सत्ताधारियों से होने का पता चलते ही उनके खिलाफ तमाम सुबूतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। यही वजह है कि पुलिस इस हाई प्रोफाइल केस को प्रेम प्रसंग की आड़ लेकर दबाना चाह रही है।
इसके लिए खुद पीड़ित छात्रा की निजता को भंग करते हुए उसे ही कसूरवार ठहराने की कोशिश की जा रही है। इस सनसनीखेज खुलासे के 48 घंटे बाद पुलिस अफसरों ने कहना शुरू कर दिया है कि पहले जांच होगी, फिर कार्रवाई। शुक्रवार को अपने आवास पर एसएसपी ने भाजपाइयों के सामने कुछ ऐसे ही तर्क पेश किये।
शास्त्रीनगर स्थित एक पब्लिक स्कूल की कक्षा नौ की छात्रा ने बुधवार को ड्रग्स स्कैंडल और नाबालिग लड़कियों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया था। छात्रा की हिम्मत से समाज में छिपी एक घिनौनी हकीकत उजागर हुई।
शुरुआत में एसएसपी डीसी दूबे ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना मेडिकल पुलिस को केस दर्ज कर कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस ने एक आरोपी अरीब निवासी जैदी सोसाइटी, नौचंदी को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
डीआईजी रेंज आशुतोष कुमार ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी को साइबर सेल की मदद लेने को कहा। गहराई से जांच में इस घिनौने गिरोह की परतें उघड़नी शुरू हुईं तो पुलिस के कदम थम गए।
केंद्रीय सेवा में कार्यरत अधिकारी की पीड़ित बेटी ने बताया कि गिरोह में एक दर्जन से अधिक युवक हैं। फेसबुक के जरिये नाबालिग लड़कियों को ड्रग्स की लत लगाकर प्रेम जाल में फंसाते हैं। फिर अश्लील क्लिपिंग बनाकर ब्लैकमेल करते हैं। गिरोह में कई पार्टियों के नेताओं के बेटे भी शामिल बताए गए।
यह गिरोह करीब 45 लड़कियों की जिंदगी से खिलवाड़ कर चुका है। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने इस केस से संबंधित अहम सुबूत भी जुटाने शुरू कर दिए हैं।
लेकिन, आरोपियों का प्रोफाइल और उनका बैकग्राउंड पता चलने पर वही पुलिस बैकफुट पर आ गई, जो कल तक बिटिया की बहादुरी की दाद देते नहीं थक रही थी।
दबाव की रणनीति पर पुलिस
दबाव की राजनीति के चलते पुलिस अफसरों को कुछ नहीं सूझा तो आरोपियों पर सख्ती के बजाय पीड़ित छात्रा को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया।
पुलिस अफसरों ने पीड़ित छात्रा की निजी जिंदगी में दखल देते हुए उसे सार्वजनिक कर यह मामला प्रेम प्रसंग से जोड़ दिया। अब छात्रा पर केस को रफा-दफा करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
खुद कप्तान ने ही पीछे खींचे कदम:
भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक विनीत अग्रवाल शारदा शुक्रवार शाम 4:30 बजे कार्यकर्ताओं के साथ एसएसपी आवास पहुंचे। उन्होंने ड्रग्स स्कैंडल के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की।
एसएसपी ने आरोपियों की करतूतों को नजरअंदाज करते हुए कह दिया कि मामला ड्रग्स स्कैंडल का नहीं, बल्कि प्रेम प्रसंग का है। उन्होंने निजता को भंग करते हुए भाजपाइयों को फेसबुक पर अश्लील चैटिंग और लव लेटर दिखाते हुए पीड़ित छात्रा पर ही सवाल खड़े कर दिए।
जबकि, पीड़ित परिवार पहले ही कह चुका है कि छात्रा छह महीने से उनके चुंगल में थी। ड्रग्स देकर उससे अश्लील हरकतें कराई गई हैं। ऐसे में भाजपाइयों ने भी सवाल उठाये कि एसएसपी उन्हें यह सब दिखाकर आखिर क्या साबित करना चाहते हैं। कम से कम एक सीनियर पुलिस अफसर को इस तरह की बाते सार्वजनिक नहीं करनी चाहिए थीं।
48 घंटे में पुलिस की उल्टी चाल:
48 घंटे में मेडिकल थाना पुलिस इस प्रकरण में एक कदम भी नहीं चली। एक आरोपी अरीब की गिरफ्तारी के बाद पुलिस मामले पर पर्दा डालने में जुटी है।
फरार आरोपियों शशांक प्रधान, सिद्धार्थ गुर्जर, शुभम प्रधान और साकिब की तलाश करना भी पुलिस भूल गई है। पुलिस ने उनकी तलाश में कोई दबिश भी नहीं दी है।
कानून भी भूले पुलिस अफसर:
वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्ण पहल और अमित दीक्षित ने बताया कि पुलिस को 24 घंटे में छात्रा के सीआरपीसी के तहत धारा-164 के बयान और मेडिकल परीक्षण कराना चाहिए था।
पुलिस को नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजना चाहिए। कानून कहता है कि नाबालिग लड़की के साथ उसके माता-पिता साथ रहेंगे। पॉक्सो एक्ट के मामले की जांच महिला दरोगा करेंगी। इन तमाम तथ्यों में से पुलिस ने एक पर भी काम नहीं किया।
एक आरोपी मंत्री का करीबी तो दूसरे सपा नेताओं के खास
शहर को झकझोर देने वाले ड्रग्स स्कैंडल और नाबालिग लड़कियों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले आरोपियों की ढाल समाज के चंद रसूखदार बन रहे हैं।
इनमें एक आरोपी का करीबी एक मंत्री है तो दूसरे सपा नेताओं का खास। आरोपियों से नेताओं के संबंध उजागर होने पर पुलिस के तेवर भी ढीले पड़ चुके हैं।
आरोपियों पर कार्रवाई करने से हिचकने के साथ ही उनकी तलाश में हाथ-पैर तक नहीं हिलाए जा रहे। पुलिस के इस रुख से आहत पीड़ित परिवार डीआईजी, आईजी से गुहार लगाने की तैयारी में है।
पीड़ित छात्रा के सामने आने और प्रकरण में मेडिकल थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कई सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। उनका शिकार होने वाले भी इस खुलासे के बाद सामने आने लगे हैं। लेकिन, पुलिस की कार्यप्रणाली को देखकर लगता है कि वह आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रति गंभीर नहीं है।
पुलिस की खामोशी और कार्रवाई न करने के पीछे कई वजहें हैं। पहली तो यह कि लड़कियों को ड्रग्स का आदी बनाने वाले गिरोह में कई नेताओं के बेटे और उनके करीबी शामिल हैं।
यही नहीं, एक मंत्री का करीबी भी इस गिरोह का सदस्य बताया जा रहा है। वहीं, कुछ अन्य लड़कों के संपर्क ऐसे नेताओं से हैं, जो पुलिस-प्रशासन में खासा दखल रखते हैं।
नेताओं के दबाव में पुलिस
मामले के खुलासे के साथ ही सपा नेताओं से आरोपी युवकों की नजदीकियों की बात सामने आ रही है। पीड़ित पक्ष की मानें तो पुलिस पर ही नहीं, उन पर भी सपा नेताओं का दबाव बन रहा है। यही वजह है कि पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
डीआईजी-आईजी से लगाएंगे गुहार
पीड़ित छात्रा के पिता ने कहा कि पुलिस को ही मामले में कार्रवाई करनी है। दो दिन बाद भी आरोपियों की तलाश नहीं हो सकी है। मुझे उम्मीद है कि पुलिस आरोपियों को पकड़कर सख्त कार्रवाई करेगी।
ऐसा नहीं हुआ तो डीआईजी और आईजी से मुलाकात कर कार्रवाई की गुहार लगाएंगे।