शास्त्रीनगर ड्रग्स स्कैंडल और गैंगरेप प्रकरण का भंडाफोड़ होने के बाद डीआईजी ने नशे के सौदागरों के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है। गुप्त सूचना पर सोमवार को शहर के सबसे पॉश एरिया आबूलेन पर स्थित एक कैफे पर छापा मारा गया तो अफसर दंग रह गए।
कैफे में बड़ी संख्या में महंगे नशीले पदार्थों के अलावा शराब की बोतलें, हुक्का और अन्य सामान बरामद हुआ है। हालांकि सदर बाजार पुलिस द्वारा छापेमारी की सूचना लीक करने से कैफे से कई युवक फरार हो गए। पुलिस ने सभी सामान जब्त करते हुए कैफे मालिक को गिरफ्तार कर लिया है।
डीआईजी रेंज आशुतोष कुमार ने सोमवार को सदर थाना पुलिस को आबूलेन स्थित रिपर्स कैफे में छापेमारी के निर्देश दिए। जिस पर एसएसआई धर्मेंद्र कुमार फोर्स के साथ कैफे पर पहुंचे। छापेमारी के दौरान पुलिस ने कैफे के अंदर से महंगे नशीले पदार्थों के दर्जनों पैकेट, शराब की बोतलें, हुक्का आदि बरामद किया गया। मौके से ही कैफे संचालक तुषार कुमार पुत्र यशपाल निवासी आबूलेन को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस से पहले कैफे तक पहुंची सूचना
सदर बाजार पुलिस के कैफे पर पहुंचने से पहले ही छापे की सूचना पहुंच गई। जबकि छापेमारी के निर्देश सीधे डीआईजी ने दिए थे। पुलिस के पहुंचने से पहले कैफे में कई कपल और युवा नशीले पदार्थों का सेवन कर रहे थे। लेकिन फैंटम पुलिसकर्मियों से मिली सूचना पर दूसरे रास्ते से सभी युवाओं को बाहर निकाल दिया गया। जबकि इस दौरान उनके वाहन कैफे के नीचे ही खड़े रहे। जिसे युवा बाद में लेकर गए।
सीसीटीवी कैमरे से रखते थे नजर
कैफे संचालक तुषार सीसीटीवी कैमरे से पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखता था। कैफे के अंदर और बाहर लगे कैमरों से हर पल-पल की जानकारी लेता था।
49 रुपये 420 रुपये में एक कश
कैफे के अंदर जाम तो छलकते ही थे। साथ ही महंगे फ्लेवर वाले नशीले पदार्थ का कश भी कैफे के अंदर मिलता था। कैफे में कई कंपनियों का 49 रुपये से लेकर 420 रुपये तक का नशा उपलब्ध था।
ब्रेन-फ्रीजर पान का कश
छोटी सी उम्र में नशे की लत में पड़ रहे युवा नए-नए तरह का नशा करने का शौक रखते हैं। उनके लिए कैफे में पान, ऑरेंज, मिंट, किवी और स्ट्रॉवेरी ही नहीं ब्रेन-फ्रीजर पान का काश भी उपलब्ध था। बताते हैं कि ब्रेन-फ्रीजर पान का एक कश 350 रुपये का है। इसका कश लेने के बाद दिमाग सुन्न हो जाता है।
यूं छेड़ी मुहिम
मेडिकल थाना क्षेत्र में छात्राओं को नशे का आदी बनाकर गैंगरेप का मामला सामने आया था। इस ड्रग्स स्कैंडल में पांच आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। चौतरफा दबाव के बावजूद जब एसएसपी स्तर से ड्रग्स माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो डीआईजी आशुतोष कुमार ने कमर कसी। स्पेशल टीम बनाकर डीआईजी ने पहले 4 दिसंबर को आलमगीरपुर थाना रोहटा क्षेत्र निवासी दीपेंद्र कुमार पुत्र सुमेश सिंह को करीब एक करोड़ रुपये कीमत की ड्रग्स के साथ
गिरफ्तार कराया।
मौके से कोई भी नाबालिग नहीं पकड़ा गया। ऐसे में कैफे के लाइसेंस की जांच के निर्देश दिए गए हैं। अगर बिना लाइसेंस कैफे संचालित किया जा रहा है तो कार्रवाई की जाएगी। ड्रग्स माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।- आशुतोष कुमार, डीआईजी