दिवाली पर अंधविश्वास के चलते लोग उल्लू की बलि देते हैं। इस संरक्षित पक्षी की तस्करी दिवाली से कई दिन पहले शुरू हो जाती है। ऐसे में ‘अमर उजाला डॉट कॉम’ पर चली खबर को संज्ञान लेते हुए वन विभाग की टीम ने मेरठ के थापर नगर में पक्षी बेचने वालों के यहां छापा मारकर तीन उल्लू समेत अन्य पक्षी बरामद किये। पता चला कि दिवाली पर इन उल्लुओं की बलि दी जाती।
डीएफओ अदिति शर्मा ने बताया कि धनतेरस और दिवाली के दिन अंधविश्वास के चलते लोग तांत्रिक क्रिया के दौरान दुर्लभ पक्षी उल्लू की बलि देते हैं। इसके चलते दिवाली से करीब एक माह पहले ही इस पक्षी की तस्करी शुरू हो जाती है। जबकि, उल्लू पकड़ना प्रतिबंधित है। उल्लू पकड़ने पर आर्थिक दंड के साथ कारावास की सजा का भी प्रावधान है। बुधवार को एक सूचना पर थापर नगर में चिड़िया बेचने वाले श्याम के यहां छापा मारा गया। जिसके यहां से 14 तोते, 40 से ज्यादा मुनिया (छोटी चिड़ियां) के साथ ही तीन स्पॉटेड उल्लू मिले।
क्या है स्पॉटेड उल्लू
उल्लुओं की 32 प्रजातियों में से स्पॉटेड उल्लू सबसे छोटा पक्षी है। स्थानीय बोलचाल में इसे खसखूदड कहते हैं। यह भी पेड़ों के भीतर बनी खोखली जगहों के साथ खोखरों में रहता है। वजह यह कि उल्लू अब बहुत कम हो गये हैं, तो पक्षियों के तस्कर उल्लू बताकर खसखूदड़ बेच देते हैं।
उठ रहे सवाल
स्पॉटेड उल्लू के साथ पकड़े गए आरोपी श्याम को वन विभाग ने हिरासत में ले लिया है। लेकिन, इस पूरे मामले में कुछ सवाल के साथ मांग भी उठने लगी है, क्योंकि श्याम चिड़िया पकड़ने वाला नहीं, बल्कि बेचने वाला है। ऐसे में श्याम से पूछताछ के बाद यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि आखिर इन पक्षियों को कहां से पकड़कर इनकी तस्करी की जा रही है। गौरतलब है कि, इससे पहले मेरठ के ही लालकुर्ती क्षेत्र से भी वन विभाग की छापामारी में कई दुर्लभ प्रजाति के पक्षी बरामद किए जा चुके हैं।