पुलिस की एक ऐसी लापरवाही सामने आयी है, जिसे देखकर हाईटेक होने का दावा खोखला साबित हो रहा है। अपनी एफआईआर लिखवाने के लिए पुलिस अधिकारियों के ऑफिसों में लोगों को चक्कर काटने पड़ते है। एक ओर सीसीटीएनएस के जरिये प्रदेशभर के जिलों में ऑनलाइन एफआईआर होने लगी, वहीं मेरठ पुलिस ने इसका मजाक बना दिया। मेरठ पुलिस ने एक केस में आंख मूंदकर दो अलग अलग थानों में मुकदमे दर्ज कराए है। दहेज उत्पीड़न के आरोपियों को महिला थाना व पल्लवपुरम थाने में गुनहगार बनाया गया है। दोनों थानों से नोटिस आने के बाद वादी और प्रतिवादी परेशान है।
पल्लवपुरम क्षेत्र के रुड़की रोड स्थित विवेक विहार निवासी जीके अग्रवाल की बेटी हर्षिका की शादी राहुल गोयल से हुई थी। हर्षिका का आरोप है कि राहुल गोयल और उसके परिजन दहेज उत्पीड़न करते है। इस संबंध में हर्षिका और उसके परिजनों ने महिला थाने में शिकायत की। जिसमें मुकदमा अपराध संख्या 3/17 राहुल व उसके परिजनों के खिलाफ महिला थाने में दर्ज हो गया। उसके बाद पुलिस ने उसकी तहरीर पर दूसरा मुकदमा अपराध संख्या 24/17 पल्लवपुरम थाने में दर्ज कर लिया। सवाल उठता है कि एक वादी व एक ही प्रतिवादी के दो अलग अलग थानों में मुकदमे दर्ज कैसे हो गए। पुलिस की ऐसी लापरवाही से हाईटेक सिस्टम पर सवाल उठने लाजिमी है।
कहां करे पैरवी, समझ नहीं आता
दो थानों में मुकदमा लिखने से वादी और प्रतिवादी परेशान है। एक बार पल्लवपुरम थाना पुलिस फोन करती और एक बार महिला थाना पुलिस। वादी व प्रतिवादियों का कहना है कि आखिर पैरवी करने के लिए जाएं तो भला कहां। इस मामले को लेकर अभी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। प्रतिवादी राहुल गोयल ने बताया कि उसको दो थानों का मुल्जिम बनाया गया है।
आंख मूंदकर कैसे हो गया मुकदमा
दहेज उत्पीड़न के मुकदमा अधिकांश उच्चाधिकारी के निर्देश पर होते है। ज्यादातर पुलिस अधिकारी महिला थाने में मुकदमा दर्ज कराते है। सवाल उठता है कि आखिर पल्लवपुरम थाने में किसके निर्देश पर दूसरा केस दर्ज हुआ। एक केस के दो थानों में मुकदमे दर्ज होने से साफ जाहिर है कि पुलिस आंख मूंदकर केस दर्ज कर लेती है।
महिला थाने का मुकदमा होगा खत्म
हर्षिका ने बृहस्पतिवार को एसएसपी को प्रार्थना पत्र सौंपा और कहा कि साहब मेरे केस के पुलिस ने दो थाने में केस दर्ज कर लिए है। उसको पल्लवपुरम नजदीक पड़ता है। वह चाहती है कि महिला थाने में दर्ज मुकदमा खत्म कर दिया जाए। एक केस में दो मुकदमे पंजीकृत सुनकर एसएसपी पहले तो चौके और फिर महिला थाने में मुकदमे को खत्म कराने की बात कही।