आरिफ की हत्या की प्लानिंग एक महीने पहले ही जेल में तैयार हो चुकी थी। हत्यारे 15 दिन से उसे मारने की फिराक में थे। जैसे ही मौका मिला तो हत्यारों ने उसे मार डाला। बचने की कोई गुंजाइश न रहे, इसके लिए उस पर तब तक फायरिंग करते रहे, जब तक उसकी मौत नहीं हो गई। एएसपी रणविजय सिंह ने बताया कि मृतक पार्षद आरिफ के भतीजे आमिर की तहरीर पर कोतवाली थाने में तारिक उसके दो भाई राजू और राशिद और जेल में बंद सारिक के बेटे ताविश व फाइक के साले साकिब के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। जबकि जेल में बंद सारिक और फाइक के खिलाफ 120 बी का मुकदमा दर्ज किया गया है।
विज्ञापन
सारिक फाइक और आरिफ की रंजिश में कई हत्याएं हो चुकीं हैं। 26 दिसंबर 16 को बिलाल हत्याकांड में बंद आरिफ के भतीजे सलमान से मिलाई करके लौट रहे किन्नर शमशाद की साकेत में हत्या कर दी गई थी। हत्या के आरोप में सारिक और फाइक भी नामजद थे। 16 मई 2017 को फाइक और सारिक के नजदीकी माने जाने वाले किन्नर पूर्व पार्षद फाको की हत्या कर दी गई थी। इस हत्या का आरोप सलमान पर आया था। हत्या में पांच लाख की सुपारी दी गई थी। दो महीने पहले सारिक और फाइक दोनों शमशाद हत्याकांड में जेल चले गए थे। तभी से आरिफ को हत्या की धमकी मिल रही थी। इसी डर की वजह से आरिफ कई दिन से घर से बाहर भी कम ही निकल रहा था। वह अधिकांश घर में ही रहता था। ईद पर भी आरिफ अधिकांश घर पर ही रहा।
एसएसपी का घेराव
पार्षद को अस्पताल ले जाते
15 दिन से उसे हत्या का डर सता रहा था। उसने पुलिस से भी ये आशंका जताई थी। हत्यारे उसके घर के आसपास मौजूद रहते थे। आरिफ भी हर समय कुछ साथियों के साथ रहता था और लाइसेंसी पिस्टल हर समय पास ही रखता था। रविवार को शाम वह घर से पिस्टल लेकर निकला और कुछ दूर जाकर वापस लौट आया। कुछ देर बाद शादाब उर्फ भूरा उसके पास आया और और शेविंग के लिए चलने को कहा। आरिफ उसके साथ चल पड़ा। शेविंग कराते समय आरिफ अंदर बैठा था, जबकि भूरा बाहर खड़ा था। तीन बाइकों पर आए हत्यारों ने पहले भूरा के सिर में गोली मारी। भूरा बाहर ही गिर पड़ा। तब हत्यारें अंदर घुसे और आरिफ पर गोलियां बरसा दी। आरिफ को पिस्टल निकालने का भी मौका नहीं मिल सका। बाद में हत्यारे लिसाड़ी गेट की तरफ फरार हो गए।
एसएसपी मंजिल सैनी मोर्चरी पर पहुंची तो आरिफ पक्ष ने उनका घेराव किया। लोगों को कहना था कि लिसाड़ी गेट पुलिस ने परिजनों पर 12 फर्जी मुकदमे दर्ज कर दिये हैं। एसएसपी ने जांच का आश्वासन दिया।
साजिश के तहत हुई हत्या
भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची एसएसपी
एसएसपी मेरठ मंजिल सैनी का कहना है कि आरिफ की हत्या सुनियोजित साजिश के तहत हुई है। जब आरोपियों के घरों पर दबिश दी गई तो महिलाएं भी घर से गायब थी। इस मामले में हत्यारों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। आशंका है कि भाडे़ के हत्यारों ने वारदात को अंजाम दिया। एसपी क्राइम के निर्देशन में चार टीमें हत्यारों की तलाश में लगाई गईं हैं।
किन्नर पर हमले का चश्मदीद था भूरा
जब शमशाद की हत्या हुई तो उसके साथ शादाब उर्फ भूरा भी था, वह इस हमले में बच गया था। साथ ही इस हत्याकांड का वह चश्मदीद था। आरिफ और शादाब उर्फ भूरे की हत्या की एक वजह ये भी मानी जा रही है।
पुलिस ने फ्लैग मार्च किया, हत्यारों ने उड़ायी कानून की धज्जियां
कांवड़ यात्रा को लेकर जहां शहर में शाम को आरएएफ, एसएसबी और स्थानीय पुलिस ने पैदल फ्लैग मार्च निकाला था। वहीं शाम होते ही हमलावरों ने कानून व्वस्था की धज्जियां उड़ा दी। थाने से चंद कदमों की दूरी पर हमलावर दो लोगों की हत्या को अंजाम देकर फायरिंग कर फरार हो गये, और शहर की सड़कों पर पुलिस को भनक तक नहीं लगी।
फारेंसिक टीम पहुंची
परिवार में मचा कोहराम
आरिफ के सिर, कनपटी के पास चार गोली लगी हैं। जबकि दूसरे साथी शादाब उर्फ भूरा के भी उसी जगह सिर में गोली लगी है जहां आरिफ को गोलियां मारी गई। फायरिंग की घटना से कोतवाली इलाका दहल गया। एसएसपी के पहुंचने से पहले ही विरोध की आशंका को देखकर क्षेत्र में आरएएफ समेत भारी संख्या में फोर्स तैनात कर दी गई थी। पुलिस की मानें तो पार्षद आरिफ अनीसू पंडित के साथ प्रोपर्टी का भी काम करता था। दो माह पहले कोतवाली क्षेत्र में अनीसू पंडित की भी हत्या कर दी गई थी। ऐसे में जहां पुलिस गैंगवार में हत्या होना मान रही है। आरिफ के खिलाफ भी कोतवाली थाने में जानलेवा हमले की धारा समेत तीन मुकदमें दर्ज थे।
घटना के बाद पुलिस ने भीड़ को देखते हुए हेयर सैलून को बंद करा दिया था। आधी रात करीब 12 बजे पुलिस की फारेंसिक टीम मौके पर पहुंची । वहां खोखे बरामद हुए। पुलिस टीम ने मौके से कई चीजों से फिंगर प्रिंट उठाए।
मुखबिरी, फर्जी नामजदगी बनी वजह
आरिफ की हत्या के पीछे पुरानी रंजिश और पुलिस की मुखबिरी भी एक वजह मानी जा रही है। माना जा रहा है कि अपने प्रभाव से विरोधियों को एक के बाद एक मुकदमों में फंसाने की वजह से भी फाइक और सारिक खार खाए बैठे थे और 15 दिन से हत्या कराने की फिराक में थे।
पुलिस के अनुसार इस वारदात में इस्माइल नगर के ही फाइक और सारिक का नाम आ रहा है। दोनों पक्ष पहले एक ही थे। दोनों मिलकर प्रापर्टी का काम भी करते थे। करीब सात साल पहले फाइक के भाई सद्दाम की शादी थी। शादी के दौरान गोली चलने से सद्दाम की मौत हो गई थी। फाइक पक्ष को शक था कि इस वारदात में आरिफ पक्ष का हाथ है। फाइक उसका भाई सारिक शूटर हैं सारिक पक्ष का नाम बेकरी कांड में भी चर्चाओं में आया था। इन पर कई मुकदमे भी हैं। उधर आरिफ का भाई सलमान हिस्ट्रीशीटर है। आरिफ ने पांच साल पहले वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ा और जीत गया। बाद में वह सपा से जुड़ गया। कई नेताओं से संपर्क बढे़ जिस कारण उसकी पुलिस से भी नजदीकी बढ़ गई। अपने इस प्रभाव से उसने फाइक पक्ष के लोगों पर कई मामले दर्ज कराए। एएसपी रणविजय सिंह के अनुसार लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र में शेरी मर्डर केस में आरिफ ने पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाकर फाइक सहित उसके पांच भाइयों के नाम नामजद रिपोर्ट करा दी बाद में जांच में वह सभी बेकसूर मिले। शेरी की मां ने खुद आकर गलत नामजदगी पर अपनी भूल मानी थी। बकौल एएसपी सोतीगंज के बिलाल मर्डर केस में आरिफ के भतीजे सलमान का नाम आया था, लेकिन आरिफ ने उसका सरेंडर करा दिया था। सलमान अब गाजियाबाद जेल में है। चौथ वसूली को लेकर भी दोनों पक्षों में तनातनी की बात आ रही है।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरों को पढ़ने के लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें