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हाईवे पर बस रुकवाकर कुख्यात कस्टडी से फरार  

Tue, 13 Dec 2016 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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इन्हीं पुलिसकर्मियों की गिरफ्त से भागा कैदी। - फोटो : अमर उजाला
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दो सिपाहियों को खाने में नशीला पदार्थ देकर एक कुख्यात बंदी हाईवे पर बस रुकवाकर कस्टडी से फरार हो गया। करीब पांच किमी आगे जाकर जब पुलिसकर्मियों की नींद टूटी तो उसकी फरारी का पता चला। बंदी का देर रात तक सुराग नहीं लगा। 
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पुलिस के अनुसार जाटान मोहल्ला पुरकाजी मुजफ्फरनगर निवासी मुत्तलीब पुत्र शराफत पर मुजफ्फरनगर में लूट, डकैती, अपहरण व हत्या के मुकदमे पंजीकृत हैं। वह पीलीभीत जेल में बंद था। जिसे बुलंदशहर और मुजफ्फरनगर में पेशी कराने के लिए बुलंदशहर जेल शिफ्ट किया गया था। पीलीभीत के हैड कांस्टेबल नरेश सिंह और कांस्टेबल श्रीकांत सोम उसे सोमवार को बुलंदशहर जेल से मुजफ्फरनगर सीजेएम कोर्ट में हत्या और जानलेवा हमले के मुकदमे में पेशी के लिए ले गए थे। पेशी के बाद मुजफ्फरनगर सुजडू चुंगी से दोनों पुलिसकर्मी बंदी के साथ अंबाला डिपो की प्राइवेट बस में बैठ गए। 
रास्ते में एक ढाबे पर बंदी और पुलिसकर्मियों ने खाना खाया। इस दौरान बंदी ने सिपाहियों को खाने में नशीला पदार्थ दे दिया। जिस पर दोनों सिपाही बस चलते ही सो गए। इसका फायदा उठाकर बंदी ने परिचालक से कहकर बस रुकवाई और हाईवे पर दादरी-भंगेला के पास उतरकर आसानी से फरार हो गया। दोनों पुलिसकर्मी सोते रह गए। जब टोल प्लाजा के समीप बस पहुंची तो उनकी आंख खुली। बंदी के फरार होने का पता चलने पर उनके होश उड़ गए।  
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दोनों सिपाही मोदीपुरम चौकी पर पहुंचे। जिसके बाद दौराला और पल्लवपुरम पुलिस ने बंदी की आसपास के जंगलों में तलाश की। लेकिन फरार बंदी का सुराग नहीं लगा। बाद में दोनों पुलिसकर्मियों का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। इंस्पेक्टर दौराला यशवीर सिंह ने बताया कि दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ लापरवाही जबकि बंदी के खिलाफ फरारी का मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है।
हथकड़ी के बजाय बांधा लुंगी से
दोनों पुलिसकर्मियों के नशे में होने पर बंदी ने ही परिचालक को पहले खतौली तक का किराया दिया था। लेकिन खतौली नहीं उतरा तो उसने आगे के लिए 10 रुपये दे दिए। थोड़ा आगे जाकर वह हाईवे पर परिचालक से 10 रुपये वापस लेकर उतर गया। परिचालक का कहना है कि बंदी के हाथ में हथकड़ी नहीं थी, जबकि पुलिसकर्मियों का दावा है कि हथकड़ी लगाई हुई थी, उसने चादर में ढक रखी थी। हालांकि बताया गया कि कुख्यात बंदी को हथकड़ी के बजाय लुंगी से बांधा हुआ था।
पहले ही बना ली थी प्लानिंग
बंदी की 8,12 और 15 दिसंबर को मुजफ्फरनगर में ही पेशी थी। 8 दिसंबर को उसने पेशी पर जाने के दौरान ही फरारी की प्लानिंग बना ली थी। सोमवार को पेशी से लौटते समय दोनों पुलिसकर्मियों को खाने में नशीला पदार्थ देकर फरार हो गया। 
तीन पुलिसकर्मी रहे गैरहाजिर
बंदी को पेशी पर ले जाने के लिए एसआई सुरेश चौहान, हैड कांस्टेबल नरेश सिंह, कांस्टेबल श्रीकांत सोम, विपुल कुमार, अक्षित देशवाल की ड्यूटी लगी थी। जबकि केवल नरेश और श्रीकांत ही उसे पेशी पर ले गए। इन तीनों पुलिसकर्मियों की गैरहाजिरी की जानकारी अफसरों को नहीं दी गई। जबकि कागजों में इनकी उपस्थिति दर्ज कर दी। जिले के अफसरों ने इस लापरवाही पर पुलिसकर्मियों को हड़काते हुए एसएसपी पीलीभीत से इनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की भी मांग की है। 
मुस्करा उठे इंस्पेक्टर दौराला
इंस्पेक्टर दौराला ने जब बस के परिचालक अरशद से पूछताछ की तो उसने बताया कि बंदी भंगेला और दादरी के पास से फरार हुआ है। यह सुनते ही इंस्पेक्टर दौराला मुस्कुरा उठे और इंस्पेक्टर पल्लवपुरम से बोले कि घटना तो खतौली की है। चलो परिचालक को अपनी गाड़ी में बैठाओ। इसके बाद उसे घटनास्थल पर लेकर चले गए। 
सीमा विवाद में उलझी पुलिस
पुलिसकर्मियों ने घटना को टोल प्लाजा के पास बताया था। जबकि परिचालक ने घटना को दादरी और भंगेला के पास बताया। जिसको लेकर दौराला और पल्लवपुरम पुलिस सीमा विवाद में ही उलझी रही।
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