देहलीगेट पुलिस ने बृहस्पतिवार रात अंतर्राज्यीय मोबाइल चोर गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह एक शहर में घटना को अंजाम देने के बाद ट्रेन और हवाई जहाज से दूसरे राज्यों में घटना करने पहुंच जाता था। आरोपी आईफोन जैसे महंगे मोबाइल को 10 हजार में बेच देते थे।
एसपी सिटी ओपी सिंह और सीओ कोतवाली रणविजय सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार रात देहलीगेट एसओ बिरेंद्र सिंह वैली बाजार के पास वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इस दौरान पुलिस ने दिल्ली नंबर की कार को रोकने की कोशिश की तो चालक ने कार दौड़ा दी। बाद में पुलिस ने घेराबंदी करते हुए कार सवार पांच लोगों को दबोच लिया। पूछताछ में पता चला कि पांचों लोग अंतर्राज्यीय गिरोह के सदस्य हैं, जो महंगे मोबाइल को चोरी और लूट करने के बाद दूसरे शहरों में बेचते थे। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी बंगाल समेत अन्य राज्यों में यह गिरोह करीब 1200 मोबाइल चोरी और लूट की घटना को अंजाम दे चुका है। आरोपियों के पास से दिल्ली के द्वारका से चोरी की गई एंडेवर कार, ढाई लाख रुपये, चार आईफोन सहित पांच मोबाइल बरामद हुए हैं। यह गिरोह ठक ठक गिरोह की तरह काम करता है। जो किसी गाड़ी के आगे चाबी, अन्य सामान फेंककर या फिर ड्राइवर को उलझाकर कार का शीशा तोड़कर बैग उड़ा देता हैं।
गिरफ्तार अभियुक्त
मोहसिन पुत्र तसलीम निवासी मटिया महल, जामा मस्जिद दिल्ली, 12 वीं पास, मोहसिन दिल्ली में शादी समारोह में काम करता है।
वकार पुत्र मो. यूसुफ मलिक निवासी गंज मीर खां थाना चांदनी महल रकाब गंज नई दिल्ली है। दसवीं पास वकार कपड़ों के काम के अलावा ठेकेदारी भी करता है।
इमरान पुत्र खलील खान निवासी कूंचा चालान, दरियागंज दिल्ली। इमरान आठवीं पास है जो दिल्ली में मोबाइल के शोरूम में काम करता है।
कासिफ पुत्र सलामुद्दीन सलमानी निवासी कोटला बाजार थाना देहलीगेट, मेरठ। दसवीं पास कासिफ गारमेंट्स की दुकान में काम करता है।
शाहबाज पुत्र अनवर खां निवासी जना रिसाला थाना सदर बाजार इंदौर, मध्यप्रदेश। शाहबाज मोबाइल शॉप पर दुकान करने के अलावा अपना काम भी करता है।
मुंबई में बैठा है सरगना
एसपी सिटी ने बताया कि पकड़े गए आरोपी कासिफ का बड़ा भाई नदीम मुंबई में रहता है। जो मोबाइल बेचने का काम करता है। उसके एक भाई छोटू को दिल्ली पुलिस ने पूर्व में गिरफ्तार किया था। कासिफ ने बताया कि वह आईफोन और सैमसंग के मोबाइल को ही निशाना बनाते थे। बाद में उन्हें दूसरे स्थान पर दस से 12 हजार में बेच देते थे।