ताबड़तोड़ हत्याओं से मितन का परिवार खौफ में है। भाई चेतन, मां सावित्री और अब जीजा बबलू को खोने के बाद मितन और उसके परिवार को समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करे। लगातार हो रही वारदातों से मितन के परिवार का पुलिस से भी भरोसा उठ गया है। पुलिस का इकबाल दम तोड़ चुका है। घर की चारदीवारी में बंद परिवार के सदस्यों के सामने रोजी रोटी का संकट बन गया है। वहीं, बहन का घर उजड़ता देख मितन अब असहाय हो गया है।
कुख्यात के शूटरों पर शक
सरूरपुर क्षेत्र के रहने वाले एक कुख्यात का नाम सावित्री और फिर उसके दामाद बबलू की हत्या में सामने आया है। पुलिस सूत्रों की मानें तो जेल में बंद इस कुख्यात ने अपने शूटरों से इन वारदात को अंजाम दिलाया।
कौन करेगा परिवार की देखभाल
बबलू के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। कृषि भूमि नहीं होने के कारण बबलू व उसके चार अन्य भाई मजदूरी करके गुजर बसर कर रहे हैं। बबलू के तीन भाइयों की शादी हो चुकी है। एक भाई का रिश्ता अभी हुआ है। बबलू राजमिस्त्री था। उसने बड़ी लड़की कोमल की शादी कर दी। उसके बाद परिवार में पत्नी सुमन, बेटी नीलम, सोनम और आरती के साथ बेटा शिवम है। बबलू की पत्नी रोते बिलखते हुये कह रही थी कि आखिर अब उसके परिवार की गुजर बसर कैसे होगी।
अब तो विश्वसनीयता पर ही सवाल
सिर पर इनाम होने के बावजूद बदमाशों ने झिटकरी गांव में प्रधान संत सिंह के घर पर रविवार रात पंचायत की। पंचायत में सावित्री की बेटी सुमन और दामाद बबलू को बुलाया गया। आरोप है कि प्रधान ने बबलू से कहा कि सावित्री की हत्या के मामले में समझौता कर लो। इस पंचायत में वांटेड नितिन और अतुल भी मौजूद बताए गए। लेकिन दंपति के न मानने पर इन्हीं बदमाशों ने सोमवार सुबह सावित्री के दामाद बबलू की सरेआम हत्या कर पुलिस की विश्वसनीयता और कार्यशैली पर ही सवाल उठा दिया है।
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