फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

EXCLUSIVE: बोरे में भरकर लाया हथियार, पूछा तमंचा लोगे या बंदूक

Wed, 01 Feb 2017 05:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
विज्ञापन
सौदागर ने दिखाए हथियार
विज्ञापन
चुनाव आते ही अवैध असलहों की मांग बढ़ने के साथ इनकी धरपकड़ और फैक्ट्रियों पर छापेमारी भी शुरू हो जाती है। विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होते ही मेरठ सहित पूरे सूबे में अवैध असलाह बनाने वाली दर्जनों फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ हुआ। बड़ी संख्या में तमंचे, पिस्टल, बंदूक और कारतूस बरामद हुए। पुलिस-प्रशासन के दावे हैं कि हथियारों के सौदागरों की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी चल रही है। ‘अमर उजाला’ की टीम ने पुलिस की सक्रियता परखी तो सामने आया कि कथित सख्ती के बावजूद सौदागर बोरे में अवैध असलाह लेकर घूम रहे हैं। टीम को मिले एक सौदागर ने बोरे में भरे असलाह दिखाते हुए पूछा कि ‘बोलो तमंचा लोगे या बंदूक’। हालांकि, रेट ज्यादा होने की बात कहते हुए उसे लौटा दिया गया।
विज्ञापन


ऐसे हुआ संपर्क
इस स्टिंग का मकसद पुलिस-प्रशासन की सक्रियता को परखना था। देखना था कि अवैध हथियारों की धरपकड़ के लिए पुलिस का अभियान कितना प्रभावी है। हथियारों के सौदागरों में कितना भय व्याप्त है। करीब 15 दिन की मशक्कत के बाद किठौर थाना क्षेत्र के जंगल में हथियारों के एक सौदागर से संपर्क हुआ। उसने कई बार मिलने का वादा किया पर आया नहीं। पूछने पर सख्ती और पुलिस गश्त का हवाला देता। काफी प्रयास के बाद गन्ने के खेतों में उसने मुलाकात की।


 
विज्ञापन

बोरे में भरकर लाया था हथियार

बोरे में भरकर लाया था हथियार
यह सौदागर विपरीत दिशा से जंगल के भीतर पगडंडियों से पैदल ही टीम के पास पहुंचा। उसके साथ एक बोरा था, जिसमें तीन 12 बोर की बंदूक के साथ पॉलीथिन में पैक छह तमंचे थे। आते ही उसने बोरा खोलकर तमंचे और बंदूक दिखानी शुरू कर दी। उसके पास बड़ी संख्या में कारतूस भी थे।

हथियार के साथ कारतूस फ्री
इस सौदागर ने तमंचे और बंदूक दिखाते हुए उनकी कीमत 5-15 हजार तक बताई। जब कीमत ज्यादा होने की बात कही गई तो उसने कहा कि एक हथियार के साथ पांच कारतूस फ्री दे दूंगा। काफी बातचीत के बाद उसने पांच हजार वाले तमंचे को तीन हजार में देने की बात कही। जबकि, बंदूक को वह 12 हजार से कम पर देने को तैयार नहीं हुआ। बातचीत में हथियार बेचने वाले ने बताया कि चुनाव से पहले तक तमंचे की कीमत दो हजार से सात हजार तक थी। लेकिन अब यह बढ़कर पांच से दस हजार हो गई है। जबकि बंदूक दस हजार में बिक रही थी, जो अब 15 हजार की हो गई है।

उक्त सौदागर के अनुसार पुलिस की इस समय ज्यादा सख्ती है। चुनावी रंजिश में मुखबिर भी ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। जिस कारण लगातार छापे पड़ रहे हैं और कई फैक्ट्री बंद है। वहीं, तैयार तमंचे भी पकड़े जा रहे हैं। जिस कारण नुकसान के बीच मांग को पूरी करना मुश्किल हो रहा है, तो कीमत बढ़ा दी है।

दूसरे राज्यों में भी डिमांड
हथियार बेचने वाले इस सौदागर के अनुसार देशी तमंचों और बंदूकों की मांग हमेशा रहती है। चुनाव में यह मांग थोड़ी बढ़ जाती है। उसके अनुसार मेरठ ही नहीं आसपास के जनपदों के साथ दूसरे राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और दिल्ली में यहां से हथियार जाते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें