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अपहृत बैंक मैनेजर की हत्या, कंकाल मिला

Fri, 08 Jul 2016 02:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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बैंक मैनेजर का शव देखते लोग - फोटो : अमर उजाला
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 दो जुलाई से अपहृत चल रहे जिला सहकारी बैंक के सहायक मैनेजर की हत्या कर दी गई। उनका शव बृहस्पतिवार को गेसूपुर स्थित नाले से बोरे में बंद मिला, जो कंकाल में बदल चुका था। हत्या के आरोप में हैंडलूम फैक्ट्री मालिक, उसके भाई और फैक्ट्री कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है।
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सीओ के अनुसार प्रताप ने फैक्ट्री मालिक को ब्याज पर 18 लाख रुपये दे रखे थे। पैसे हड़पने के लिए हत्या का प्लान बनाया गया था। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने मैनेजर के कपड़े, घड़ी और मोबाइल फोन बरामद कर लिया।
सीओ सिविल लाइन बीएस वीर कुमार के अनुसार मेडिकल क्षेत्र के कमालपुर गांव निवासी प्रताप सिंह कचहरी स्थित जिला सहकारी बैंक में सहायक मैनेजर थे। कांशीराम कॉलोनी निवासी राजकुमार की गढ़ रोड पर हैंडलूम फैक्ट्री है। प्रताप ने राजकुमार को खुद के दस लाख, अपनी साली के पांच लाख व एक रिश्तेदार के तीन लाख रुपये 10 फीसदी के हिसाब से ब्याज पर दे रखे थे। राजकुमार दो महीने से ब्याज भी नहीं दे रहा था।
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पैसा हड़पने के लिए राजकुमार ने अपने भाई संजय और फैक्ट्री कर्मचारी विकास निवासी गेसूपुर भावनपुर के साथ मिलकर प्रताप की हत्या का प्लान बनाया था। दो जुलाई को जब प्रताप ब्याज के पैसे लेने फैक्ट्री पहुंचा था तो तीनों लोगों ने शराब पिलाकर उसे लोअर के नाड़े से गला घोंटकर मार डाला था। बाद में शव बोरे में बंद कर नाले में फेंक दिया था। प्रताप के परिजनों के हंगामे पर बुधवार को पुलिस ने गुमशुदगी को अपहरण में तरमीम कर तीनों आरोपियों से सख्ती से पूछताछ की तो केस खुल गया।

पुलिस चाहती तो पहले खुल जाता केस   
मेरठ। मैनेजर की हत्या के मामले में मेडिकल थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि परिजनों ने शुरू में ही आरोपी राजकुमार पर शक जता दिया था। लेकिन पुलिस हिरासत में लेने के बाद भी उससे कुछ नहीं उगलवा सकी। राजनीतिक दबाव और हंगामे के बाद पुलिस सक्रिय हुई। क्राइम ब्रांच ने केस को हैंडल किया, इसके बाद ही शव मिल पाया।
दरअसल, प्रताप के परिजनों ने दो जुलाई से ही राजकुमार पर संदेह जता दिया था। उस रात पवन जब फैक्ट्री पहुंचा था तो वहां प्रताप के बजाय उनके द्वारा उसी दिन हापुड़ अड्डे से खरीदी गई एक वॉल क्लॉक फैक्ट्री में मिली, इसके बाद से उनका राजकुमार पर शक गहरा गया था। इसके बावजूद पुलिस ने गुमशुदगी बताकर राजकुमार से सख्ती से पूछताछ नहीं की। इसके बाद जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन और सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह ने एसएसपी से बात की तो पुलिस कुछ गंभीर जरूर हुई। लेकिन दो दिन बाद भी कुछ नहीं उगलवा सकी।

ईद के कारण चुप थी पुलिस
सूत्रों के अनुसार क्राइम ब्रांच द्वारा आरोपियों से सख्ती से पूछताछ के बाद बुधवार रात ही मैनेजर हत्याकांड का खुलासा हो गया था। जिसके बाद रात को ही मेडिकल थाना पुलिस खुद मैनेजर के घर गई और परिजनों को बताया कि वह 99 प्रतिशत केस के खुलासे की तरफ है। एक प्रतिशत काम बाकी है। यह काम भी बृहस्पतिवार को पूरा हो जाएगा। पुलिस बवाल के अंदेशे से चुप थी और ईद की नमाज के बाद खुलासा करना चाहती थी।

दांत से की पहचान
प्रताप के बेटे पवन ने आरोपियों से बरामद कपड़े, घड़ी और मोबाइल पर यकीन तो किया। लेकिन शव की असली पहचान के लिए दांत देखे, जिसमें एक दांत तिरछा था। प्रताप का भी यह दांत तिरछा ही था। जिसके आधार पर शव पहचाना।

परिजनों में कोहराम
प्रताप की हत्या के बाद उनकी पत्नी रेशमी और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था। बेटे पवन और अनिल, बेटी सारिका और प्रीति ने रोते हुए कहा कि हमारे पापा ने क्या बिगाड़ा था। पैसे नही देने थे तो हमें बता देते। पापा को तो न मारते।
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