कानून के विशेषज्ञ बोले, पास्को एक्ट का किया उल्लंघन
कोर्ट में आरोप सिद्ध करने को लेकर पुलिस पर सवाल
मेरठ।
छात्रा से छेड़खानी, बदसलूकी और वीडियो बनाकर वायरल करने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस ने सेटिंग से की है। तीन आरोपी दूसरे समुदाय से जुड़े हैं। उसको लेकर किठौर में तनाव की स्थिति बनी हुई है। पुलिस ने इस केस की नींव भी बेहद कमजोर रखी है, जो कि सवालों के ‘कठघरे’ में है।
किठौर थाना पुलिस ने शुक्रवार देररात आरोपी पक्ष के लोगों से साठगांठ कर गौरव उर्फ गोल्डी को गिरफ्तार किया। शनिवार दिनभर मामले को लेकर गहमागहमी रही। उसके चलते पुलिस ने अन्य आरोपी फिरोज पुत्र नौशाद, सजर पुत्र जावेद उर्फ बब्लू और तालिब पुत्र अफजाल की पहचान भी वीडियो के जरिये कराई। उक्त तीनों आरोपियों को नामजद किया। शनिवार देररात पुलिस ने अन्य तीन आरोपियों को भी सेटिंग से गिरफ्तार किया।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों पर धारा 294 (कमेंटबाजी), पास्को और आईटी एक्ट लगाया है। सवाल है कि मुकदमे में सिर्फ छात्रा से कमेंटबाजी दर्शायी गई है। जबकि आरोपी वीडियो में बदनीयती से छात्रा से छेड़खानी और बदसलूकी कर रहे हैं। वहीं वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस ने आईटी एक्ट लगाया है।
क्या कहते है कानून के जानकार
वरिष्ठ अधिवक्ता अमित दीक्षित का कहना है कि पुलिस ने पास्को अधिनियम का उल्लंघन किया है। मामले में धारा 345 डी लगानी चाहिए थी। जिसमें छात्रा के बयान लेने की जरूरत नहीं है। वीडियो के आधार पर केस को मजबूत किया जाना चाहिए था। पास्को एक्ट के नियमानुसार महिला कांस्टेबल सादी वर्दी में छात्रा के बयान ले सकती है, जोकि कोर्ट में मान्य है। स्कूल टीचर या फिर चाइल्ड हेल्पलाइन से मदद पुलिस को लेना भी जरूरी है। ताकि छात्रा को वह समझा सकें। लेकिन पुलिस ने ऐसा कोई काम नहीं किया।
वर्जन----
छात्रा ने बयान देने से मना कर दिया है। इसको देखते हुए धारा 294 लगाई गई है। पुलिस की तरफ से रिपोर्ट दर्ज हुई है। पास्को एक्ट और आईटी एक्ट लगाया है। पुलिस विवेचना भी मजबूत तरीके से करेगी। कोई लापरवाही नहीं की जाएगी। -नितिन तिवारी, एसएसपी