साठगांठ से रोजाना 7000 लीटर सरकारी तेल की चोरी
मेरठ। आईओसी डिपो के आसपास तेल माफियाओं के 14 बड़े गोदाम हैं। डिपो से रोजाना करीब 170 टैंकर निकलते हैं। एक गोदाम में करीब 12 टैंकरों से तेल चोरी होता है। रोजाना औसतन करीब 7000 लीटर सरकारी तेल की चोरी होती है। एक माह में करीब 1.36 करोड़ का खेल इस काले कारोबार में होता है। एसपी एसटीएफ आलोक प्रियदर्शी के अनुसार इस काले कारोबार में पूठा गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों ने गोदाम बना लिए हैं। जहां इन टैंकरों से तेल चोरी होता है। इसमें धंधे से करीब 300 लोग जुड़े हैं।
बाजार से सस्ता सौदा
एसपी के अनुसार एक टैंकर में करीब 12 से 24 हजार लीटर पेट्रोल/डीजल आता है। प्रति टैंकर 40 लीटर तेल चोरी होता है। ऐसे में यह चोरी आसानी से पकड़ में नहीं आती। पेट्रोल पंप पर टैंकर पहुंचने पर तेल हिलने से उसका गेज ऊपर हो जाता है। यदि किसी टैंकर से ज्यादा तेल चोरी होता है तो उसकी पूर्ति साल्वेंट या इथेनॉल डालकर कर दी जाती है। गोदामों में ये भी उपलब्ध रहता है। ये इथेनॉल करीब 20 रुपये लीटर आता है। तेल माफिया बदले में टैंकर चालक को एक हजार रुपये देते हैं। यानी उन्हें औसतन 25 रुपये रुपये लीटर तेल पड़ता है। ये तेल बाजार रेट से पांच या 10 रुपये सस्ता बेच दिया जाता है। इस संगठित अपराध से माफिया मोटी कमाई कर रहे हैं।
मजबूत नेटवर्क, सटीक मुखबिरी
मोटी कमाई के कारण माफियाओं का नेटवर्क भी बेहद मजबूत बनाया हुआ है। टैंकर चालकों से सेटिंग से लेकर गोदाम के आसपास मुखबिरों की सक्रियता रहती है। किसी छापामारी की भनक पर इनके पास पहले ही सूचना पहुंच जाती है। इसके लिए माफिया काफी पैसा खर्च करते हैं। एसटीएफ ने भी टीपी नगर पुलिस के गोदाम तक पहुंचने से पहले दबिश दे दी थी।
अमर उजाला पहले ही कर चुका था खुलासा
पूठा गांव में चल रहे तेल के इस खेल का ‘अमर उजाला’ पहले ही खुलासा कर चुका था। अमर उजाला ने बताया था कि किस तरह गांव में तेल चोरी का खेल चल रहा है। थाने के फैंटम पुलिस कर्मी भी किस तरह इसमें सहयोगी बने थे। अब एसटीएफ की दबिश के बाद साफ हो गया है कि किस तरह अफसरों की नाक के नीचे ये सब हो रहा था।
खास बातें:
170 टैंकर निकलते हैं डेली डिपो से, डिपो के आसपास 14 बड़े गोदाम