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ओटीपी से फ्रॉड करने वाले गिरोह का भंडाफोड़

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ओटीपी जानकर 1.60 लाख ठगने वाली युवती दिल्ली से गिरफ्तार
दो साथी हो गए फरार, क्रेडिट कार्ड का नवीनीकरण कराने के नाम पर ठगा था
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। न्यू मोहनपुरी के निवासी से क्रेडिट कार्ड का ओटीपी जानकर 1.60 लाख रुपये ठगने वाली युवती को पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। उसके दो साथी फरार हो गए। देशभर में फैला यह गिरोह करीब 16 लाख रुपये की ठगी कर चुका है। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश कर रही है।
न्यू मोहनपुरी निवासी सतीश सैनी को तीन अप्रैल को एक युवती ने फोन किया। युवती ने खुद को बैंककर्मी बताते हुए कहा कि उनके क्रेडिट कार्ड की अवधि खत्म हो रही है, घर बैठे नवीनीकरण करा सकते हैं। सतीश झांसे में आ गया और ओटीपी बता दिया। अगले दिन सतीश के ई-मेल पर 1.60 लाख की शॉपिंग किए जाने का मेसेज आ गया। सतीश ने पहले पुलिस और उसके बाद साइबर सेल में शिकायत की। जांच में पता चला कि सतीश के क्रेडिट कार्ड से दिल्ली में ज्वैलरी का ऑर्डर दिया गया है। साइबर सेल ने ज्वैलर्स से संपर्क साधा और ज्वैलरी की डिलीवरी रुकवा दी। मंगलवार को योजनाबद्ध तरीके से साइबर सेल टीम में शामिल प्रभारी योगेंद्र सिंह, एक्सपर्ट रवि शंकर यादव, एसआई लोकेश अग्निहोत्री दिल्ली पहुंचे। सर्विलांस के जरिये एक फ्लैट पर छापा मारकर युवती को गिरफ्तार कर लिया, जबकि उसके दो साथी फरार हो गए। युवती ने अपना नाम रितिका हकीजा और फरार एक साथी का नाम पवन जायसवाल पुत्र अनिल जायसवाल निवासी हस्तला रोड उत्तमनगर दिल्ली बताया। बुधवार को साइबर सेल युवती को मेरठ ले आई और कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
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रजिस्टर्ड नंबर बदलकर की ठगी
साइबर सेल के अनुसार यह गिरोह ओटीपी को ठगी का आधार बनाता है। सतीश सैनी से ओटीपी जानकर ठगों ने पहले उसका रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बदला। क्रेडिट कार्ड के सभी मेसेज उस बदले हुए नंबर पर आने लगे। इसके बाद ज्वैलरी पसंद कर उसका ऑर्डर दे दिया। इस गिरोह का नेटवर्क पूरे देश में फैला है। ये लोगों को झांसा देकर उनके क्रेडिट कार्ड से करीब 16 लाख की शॉपिंग कर चुके थे। 12 लाख के सामान की डिलीवरी भी ले चुके थे। यह गिरोह कार से ही ठगी का रैकेट चलाता था, कोई दफ्तर नहीं था। कार का मूवमेंट होने के कारण इन्हें पकड़ना आसान नहीं था।

वर्जन
इस मामले में दो लोग अभी फरार हैं, जिनमें से एक का नाम सामने आ गया है। फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है।
- योगेंद्र सिंह, प्रभारी, साइबर सेल
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