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यू ट्यूब पर वीडियो देखकर बन बैठे साइबर क्रिमिनल

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यू ट्यूब पर वीडियो देखकर बन बैठे साइबर क्रिमिनल
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मेरठ। आईटी में डिप्लोमा कर चुका एक युवक अपने हुनर को सही दिशा में ले जाने के बजाय अमीर बनने के लालच में साइबर क्रिमिनल बन बैठा। यू ट्यूब पर एक वीडियो देखकर ऐसा साफ्टवेयर बनाया, जिसके सहारे करीब आठ माह में वेस्ट यूपी के लूट और चोरी के एक हजार से ज्यादा मोबाइल फोनों के आईएमईआई नंबर बदल डाले। शनिवार को यह गैंग बेनकाब करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
एसपी क्राइम शिवराम यादव और एएसपी कैंट सतपाल सिंह ने प्रेसवार्ता में बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि मेट्रो प्लाजा स्थित एक मोबाइल फोन शॉप में चोरी और लूट के मोबाइल फोनों के आईएमईआई नंबर बदले जाते हैं। जहां छापा मारकर चेतन सैनी निवासी न्यू मीनाक्षीपुरम थाना कंकरखेड़ा और आसिफ पुत्र आशिक निवासी समर गार्डन थाना लिसाड़ी गेट को दबोच लिया गया।
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शातिर दिमाग ने बनाया साफ्टवेयर
एसपी के अनुसार चेतन ने 12 वीं के बाद आईटी में डिप्लोमा किया। मोबाइल शॉप पर काम करने के दौरान उसने यू ट्यूब पर एक वीडियो देखा था, जिसमें एक साफ्टवेयर के सहारे आईएमईआई बदलने की तकनीक बताई गई थी। इसके बाद उसने यह साफ्टवेयर बनाकर आईएमईआई नंबर बदलना शुरू कर दिया था। करीब आठ माह में वह 700-1000 मोबाइल फोनों के आईएमआई नंबर बदल चुका था। इनसे अलग-अलग कंपनी के 13 मोबाइल फोन, एक डेस्कटॉप, सिम, बाइक और अन्य सामान बरामद हुआ।
एक मोबाइल के एक हजार रुपये
चेतन ने बताया कि आईएमईआई नंबर बदलवाने के लिए उसके पास मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद से लोग आते थे। एक मोबाइल नंबर का आईएमईआई नंबर बदलने के लिए पांच सौ से एक हजार रुपये लिए जाते थे।
सुरक्षा के लिए खतरा था यह गैंग
एएसपी सतपाल सिंह ने बताया कि 12 वीं पास डिप्लोमा किए युवक ने तो पुलिस के एक्सपर्ट भी फेल कर दिए। यह गैंग तो सुरक्षा के लिए खतरा भी बन सकता था। इसके नेटवर्क को खंगालने के लिए पुलिस टीम काम कर रही है। जो अन्य लोग भी शामिल हैं उन्हें भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
नहीं होते थे ट्रेस
एसपी क्राइम ने बताया कि चोरी या लूटे हुए मोबाइल फोन को पुलिस का सर्विलांस सेल आईएमईआई नंबर की सहायता से ट्रेस कर लेता है। लेकिन ये आरोपी सॉफ्टवेयर की मदद से आईएमईआई नंबर के कई अंक बदल देते थे, जिसके बाद सर्विलांस सिस्टम भी इसे ट्रेस नहीं कर पाता था।
कंट्री कोड भी तोड़ते थे
एसपी क्राइम के अनुसार ये आरोपी चोरी या लूटे गए आईफोन का कंट्री कोड तक तोड़ देते थे। जिससे यह पता नहीं चल पाता था कि आईफोन किस देश से खरीदा गया था। उसके बाद आईफोन को बेच देते थे।
गिरोह खरीदता था ऐसे मोबाइल
एसपी के अनुसार आरोपी आसिफ खुद भी मोबाइल फोन चोरी करने के अलावा लूटता था। उससे और चेतन से लिसाड़ीगेट, नौचंदी, कोतवाली, ब्रह्मपुरी आदि के ऐसे अपराधियों से संपर्क थे जो मोबाइल फोन चोरी करते या लूटते हैं। ऐसे मोबाइल फोनों के आईएमईआई नंबर बदलकर इन्हें बेच दिया जाता था।
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क्या है आईएमईआई नंबर
इंटरनेशनल मोबाइल इक्वेपमेंट आईडेंटिटी यानी अंतरराष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान संख्या (आईएमईआई) जो प्रत्येक मोबाइल फोन का अलग होता है। इसके 15 नंबरों में मोबाइल फोन का मॉडल, मूल और डिवाइस की जानकारी दर्ज होती है। आप अपने चालू मोबाइल फोन में स्टार हैश 06 हैश डायल करेेंगे तो आपके मोबाइल फोन का आईएमईआई नंबर सामने आ जाएगा।


खास बातें:
आठ माह में बदल चुके चोरी और लूट के 1000 मोबाइल फोनों के आईएमईआई नंबर
आईटी में डिप्लोमा करने के बाद बना मोबाइल रिपेयर में एक्सपर्ट, दो आरोपी गिरफ्तार
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