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एनआईए पर हमले का मामला:

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एनआईए पर हमले का मामला:
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पुलिस की रडार पर नाहली का हर घर
- भोजपुर के नाहली गांव में एक हजार परिवार रह रहे हैं
- रविवार की रात से गांव में पुलिस की दबिश है जारी
- 10 सदस्यीय तीन टीम गांव में सिर्फ दबिश दे रहीं हैं

मोदीनगर (गाजियाबाद) । पंजाब के आरएसएस नेता रवींद्र गोसाईं के हत्यारों को हथियार मुहैया कराने वाले सप्लायर मलूक की तलाश में पुलिस ने भोजपुर के नाहली गांव को रडार पर ले लिया है। रविवार की रात से गांव में दबिश जारी है। सोमवार को दिन मेें भी दबिश देने के साथ ही गांव में रूट मार्च निकाला गया। इसके साथ ही सोमवार की रात पुलिस ने बड़े स्तर पर गांव में छानबीन की। दो युवकों को गिरफ्तार कर रिपोर्ट दर्ज की गई है।
नाहली गांव में करीब एक हजार परिवार रहते हैं और चार हजार से ऊपर की आबादी है। गांव में दबिश देने का जिम्मा पुलिस की तीन टीमों को सौंपा गया है। हर टीम में 10 सिपाही हैं। हालांकि ताबड़तोड़ दबिश देने के बावजूद पुलिस के हाथ कोई नहीं लगा है। सूत्रों की मानें तो रविवार एक बजे पुलिस ने पूरी तैयारी के साथ दबिश दी। बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स होने की वजह से पहले जैसे पथराव और विरोध के हालात नहीं बने। गांव में तनाव की स्थिति बनी रही। पुलिस ने रात में कई राउंड में गांव में अलग-अलग जगहों पर दबिश दी। इसके साथ ही सोमवार को दिन और फिर रात में बड़े स्तर पर दबिश जारी रही। भोजपुर थाना प्रभारी रामेश्वर सिंह ने बताया कि तीन टीमें कार्रवाई में जुटी हैं। एहतियात गांव में पीएसी तैनात कर दी गई है। खालिद पुत्र मुस्तकीम और यूसुफ पुत्र फरियाद को गिरफ्तार किया गया है।
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गौरतलब है कि रविवार की सुबह एनआईए, एटीएस, एसओजी और गाजियाबाद पुलिस पर गांव की महिलाओं ने पथराव कर हथियार सप्लायर मलूक को उनके चंगुल से छुड़ा लिया था। फायरिंग में एक पुलिसकर्मी और पथराव में एसओजी प्रभारी समेत सात पुलिस कर्मी घायल हो गए थे।

- बच्चे नहीं गए स्कूल-कालेज, महिलाएं ही बाहर दिखाई दीं
गांव में तनाव इस कदर है कि रविवार की वारदात के बाद सोमवार को बच्चे स्कूल और कालेज नहीं गए। बच्चे घरों में ही रहे। बच्चों के साथ ही गांव के अन्य लोग घरों में दुबके रहे। कुछ घरों के बाहर ही महिलाएं दिखाईं दीं।
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- गांव में नहीं एक भी नौजवान
रविवार की वारदात के बाद से गांव में एक भी नौजवान दिखाई नहीं दे रहा है। पुलिस ने पूछताछ और सूत्रों के आधार पर कई घरों में दबिश दी, लेकिन वहां महिलाओं और बच्चों के अलावा कोई नहीं मिला है। यहां तक कि बुजुर्ग भी घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। गांव वासियों को डर है कि नौजवानों के मौजूद होने पर पुलिस उन्हें पकड़ लेगी।
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