कंकरखेड़ा। डिफेंस एंकलेव स्थित एक एजूकेशन ग्रुप के चेयरमैन की कोठी पर रिकवरी के लिए पहुंची आंध्रा बैंक की 15 सदस्यीय टीम को चेयरमैन व उसके गार्डों ने बंधक बना लिया। आरोप है कि बैंक के डीजीएम, शाखा प्रबंधक व अन्य कर्मचारियों के साथ अभद्रता व मारपीट की गई। इस दौरान कोठी के बाहर रह गए बैंक के क्लर्क की सूचना पर पहुंची कंकरखेड़ा पुलिस ने टीम को बंधनमुक्त कराया। हालांकि मामले में कोई तहरीर नहीं दी गई।
पल्लवपुरम स्थित आंध्रा बैंक की शाखा प्रबंधक रितु शर्मा ने बताया कि एक एजूकेशन ग्रुप के चेयरमैन ने करीब तीन साल पूर्व बैंक से 15 लाख रुपये का लोन लेकर दो कारें खरीदी थीं। कई बार नोटिस के बावजूद एक भी किस्त जमा नहीं की गई। जिसके चलते बैंक के डीजीएम राजेंद्र सिंह, असिस्टेंट मैनेजर प्रीति सिंह, सचिन, नितिन आदि सहित 15 सदस्यों की टीम रिकवरी के लिए रविवार को डिफेंस एंकलेव स्थित चेयरमैन के आवास पर पहुंची।
इस दौरान मेन गेट से गार्ड द्वारा एक-एक करके सभी अधिकारी व कर्मचारियों को अंदर बुला लिया गया। आरोप है कि उसके बाद चेयरमैन ने गार्ड से कहकर गेट बंद करके ताला लगवा दिया। रितु शर्मा का आरोप है कि चेयरमैन और गार्डों ने एक नहीं सुनी और गालीगलौज व मारपीट शुरू कर दी। मारपीट में महिला अधिकारियों को भी नहीं बख्शा गया। घर की महिलाओं ने उनके साथ भी मारपीट की।
इस दौरान बैंक शाखा का क्लर्क निहाल सिंह किसी कारण देर से कोठी पर पहुंचा था। जिसके कारण वह बाहर ही रह गया। काफी आवाज लगाने के बाद भी जब कोठी का गेट नहीं खुला तो अनहोनी का अंदेशा होने पर उन्होंने मैनेजर रितु शर्मा को फोन किया तो पता चला कि टीम को बंधक बना लिया गया है। अधिकारियों ने क्लर्क को तुरंत पुलिस को सूचना देने के लिए कहा। उसके बाद गार्डों ने अधिकारियों से फोन भी छीन लिए। क्लर्क ने तुरंत कंट्रोल रूम को सूचना दी। सूचना पर कंकरखेड़ा थाने के बजाय सदर थाने की यूपी 100 गाड़ी मौके पर पहुंची। काफी देर बाद कंकरखेड़ा पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और बैंक टीम को बंधनमुक्त कराया। इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा सचिन मलिक का कहना है कि बैंक टीम के बंधक बनाने की सूचना मिली थी। पुलिस को मौके पर भेजकर टीम को बंधनमुक्त कराया गया। बैंक अधिकारियों ने आरोपी के खिलाफ कोई तहरीर नहीं दी है। उनका कहना है कि मामला बातचीत करके निपटाया जा रहा है। आरोपी बैंक का ऋण देने के लिए राजी हो गया है।
बातचीत हो गयी है
शाखा प्रबंधक रितु शर्मा का कहना है कि आरोपी ने बिना बातचीत किए ही मारपीट शुरू कर दी। घर का दरवाजा बंद करके ताला लगवा दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बंधनमुक्त कराया। बाद में बातचीत कर वाद विवाद को खत्म कर दिया। आरोपी अब ऋण देने के लिए सहमत हो गया है।
...जाओगे मेरी मर्जी से
कर्मचारी सचिन और नितिन ने बंधनमुक्त होने के बाद पुलिस को आरोप लगाते हुए बताया कि आरोपी कह रहा था कि आए हो तुम अपनी मर्जी से लेकिन जाओगे मेरी मर्जी से। उसके बाद गेट का ताला लगाकर मारपीट शुरू कर दी।
न मारपीट और न बंधक बनाया
वहीं इस बारे में चेयरमैन का कहना है कि बैंक कर्मियों के साथ कोई मारपीट नहीं की गई न ही बंधक बनाया गया। वे तो किसी काम से आए थे।
तहरीर नहीं दी
एसपी सिटी मान सिंह चौहान के अनुसार बैंक के मुख्य प्रबंधक ने बताया है कि बंधक बनाने का मामला नहीं है। लोन के संबंध में टीम गई थी। जांच पड़ताल के बाद टीम लौट आई। कोई तहरीर भी बैंक अधिकारियों ने नहीं दी है।