मेरठ। घूसखोरी में पकड़े गए डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक कुमार को जेल भेजने में सिविल लाइन पुलिस को पसीने छूट गए। पुलिस ने पहले डिप्टी सीएमओ को जिला अस्पताल में भर्ती कराया, फिर बिना डिस्चार्ज कराए जेल लेकर पहुंच गई। जेल प्रशासन ने बिना डिस्चार्ज कार्ड लेने से इंकार कर दिया। करीब दो घंटे तक खूब खींचतान हुई। बाद में एसएसपी के हस्तक्षेप के बाद जेल में दाखिल किया गया।
मवाना सीएचसी के डॉ. नीरज तोमर की शिकायत पर विजिलेंस टीम ने मंगलवार को डिप्टी सीएमओ को डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। शासन ने डिप्टी सीएमओ को सस्पेंड कर दिया था। बुधवार सुबह करीब 11 बजे पुलिस कस्टडी में डॉ. अशोक को हार्ट की परेशानी हुई। जिस पर सिविल लाइन पुलिस ने डॉ. अशोक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस अफसरों ने थाना पुलिस को फटकार लगाई और आरोपी डॉक्टर को जेल भेजने को कहा।
दोपहर 2:30 बजे सिविल लाइन पुलिस जिला अस्पताल पहुंची और डिप्टी सीएमओ को बिना डिस्चार्ज कराए पहले कचहरी और फिर जेल लेकर पहुंच गई। जेल प्रशासन ने बिना डिस्चार्ज कार्ड के डिप्टी सीएमओ को दाखिल करने से मना कर दिया। जिस पर पुलिस और जेल के अफसरों में बहस होती रही। बाद में एसएसपी ने वरिष्ठ जेल अधीक्षक से फोन कर बात की तो डिप्टी सीएमओ को जेल प्रशासन ने दाखिल किया।
अब कहां ले जाएं इसे हम
सिविल लाइन पुलिस डिप्टी सीएमओ को जब जेल लेकर पहुंची तो जेल के स्टाफ ने गेट पर रोककर कह दिया कि बीमार आरोपी को हम जेल में दाखिल नहीं कर सकते। पुलिस बोली कि अब हम इसे कहां ले जाएं तो जेल प्रशासन ने कहा कि यह आपकी टेंशन है। जब तक जिला अस्पताल का डिस्चार्ज कार्ड नहीं लाओगे, हम दाखिल नहीं करेंगे। कई बार पुलिस जिला अस्पताल गई। लेकिन डॉक्टर डिस्चार्ज कार्ड देने से मना करते रहे।
ब्लड यूरिया, क्रिएटिनिन, शुगर बढ़ी थी
सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक कुमार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बेड नंबर सात पर भर्ती कराया गया था। उनकी जांच हुई तो उसमें उनका ब्लड यूरिया, क्रिएटिनिन, शुगर बढ़ी हुई आई। दोपहर करीब ढाई बजे तक वह पुलिस अभिरक्षा में भर्ती रहे। इसके बाद पुलिसकर्मी उन्हें बिना डिस्चार्ज कार्ड अस्पताल से ले गए। सीएमओ ने बताया कि जेल कर्मियों ने बिना डिस्चार्ज कार्ड के जेल में अंदर लेने से मना कर दिया। इसके बाद पुलिस अफसरों व स्वास्थ्य विभाग की अफसरों की आपस में बातचीत होती रही। जिला अस्पताल से डिस्चार्ज कार्ड देने से यह कहते हुए मना किया जाता रहा कि जिस व्यक्ति का स्वस्थ खराब है, वे उसका डिस्चार्ज कार्ड नहीं बना सकते हैं। एसएसपी के अनुसार डिप्टी सीएमओ की हालत थोड़ी खराब हो गई थी। पुलिस ने उनका जिला अस्पताल में इलाज कराया। जिला अस्पताल ने डिस्चार्र्ज कार्ड नहीं दिया, जिसके चलते परेशानी हुई। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जिसके बाद उनको जेल भेजा गया।
टीम का दोबारा होगा गठन
सीएमओ ने बताया कि निजी प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों को पकड़ने वाली स्वास्थ्य विभाग की टीम का दोबारा गठन होगा। दो डॉक्टरों को यह जिम्मेदारी दी जाएगी। वहीं, सीएमओ कार्यालय में बुधवार को भी निलंबित डिप्टी सीएमओ की गिरफ्तारी का मामला चर्चा का विषय बना रहा।
खास बातें:
- तबियत खराब बताकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया था
- बिना डिस्चार्ज कराए ही पुलिस जेल लेकर पहुंच गई
- जेल प्रशासन ने लेने से किया इंकार, दो घंटे खींचतान के बाद लिया