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हरियाणा से चोरी कर वेस्ट यूपी में बेचे जा रहे थे ट्रक, तीन आरोपी गिरफ्तार
अलीगढ़ और कुशीनगर में आरटीओ के बाबू की मिलीभगत से बनवाए जाते थे फर्जी कागजात
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। ट्रक चोरी में शतक लगाने वाले वाहन चोर गैंग के तीन आरोपियों को किठौर पुलिस ने गिरफ्तार कर चोरी के चार ट्रक बरामद किए हैं। ये आरोपी हरियाणा से ट्रक चोरी कर मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़ जिलों में छह से आठ लाख रुपये में बेच देते थे। पुलिस के अनुसार गिरोह तीन वर्षों में 100 से ज्यादा ट्रकों को चोरी बेच चुका है।
एसपी देहात राजेश कुमार और सीओ किठौर चक्रपाणि त्रिपाठी ने रविवार को प्रेसवार्ता में बताया कि सूचना मिली थी कि किठौर अड्डे पर जो ट्रक खड़े होते हैं उनमें अधिकांश का चेसिस और इंजन नंबर फर्जी होता है। ट्रक बेचने का यहां सौदा किया जाता है। जिस पर इंस्पेक्टर किठौर आनंद मिश्रा ने अड्डे से एक आरोपी को कब्जे में ले लिया। पूछताछ में गिरोह का खुलासा होने पर तीन ट्रक बरामद किए गए। बरामद ट्रकों की फोरेंसिक एक्सपर्ट द्वारा जांच की गई तो चारों ट्रकों पर इंजन और चेसिस नंबर फर्जी पाए गए।
गिरफ्तार आरोपी
कालीचरण निवासी पुराना बागपत अड्डा थाना ब्रह्मपुरी, अनस निवासी सिंधावली थाना कंकरखेड़ा, मो. मुस्तैती उर्फ मुस्ताजी निवासी राधना इनायतपुर थाना किठौर हैं। नौशाद निवासी सिवालखास, अता मौहम्मद निवासी सिंधावली, शहनवाज निवासी राधना और सुनील निवासी मलियाना फरार हैं।
नए ट्रक निशाने पर
एसपी देहात के अनुसार आरोपी कालीचरण और नौशाद गिरोह के सरगना हैं। चोरी के लिए हरियाणा में अलग-अलग स्थानों और ट्रांसपोर्ट नगर से नए ट्रक ही चोरी करते थे। इन ट्रकों की कीमत 15 से 20 लाख रुपये की होती थी। जिन्हें फर्जी कागज बनवाकर छह से आठ लाख रुपये में बेचते थे।
आरटीओ से बनवाते थे फर्जी कागजात
एसपी देहात ने बताया कि इस गिरोह के आरोपियों की कुशीनगर और अलीगढ़ के आरटीओ ऑफिस में कई कर्मचारियों से साठगांठ है। अता मोहम्मद चोरी के लिए ट्रक तलाशता था। आरटीओ ऑफिस से कागजात बनवाने की जिम्मेदारी कालीचरण पर होती थी। वहीं अनस और सुनील ट्रक बेचने के लिए ग्राहक तलाशते थे। जिन ट्रकों को चोरी करते थे, उन्हें किठौर और हापुड़ रोड पर गोदाम में ले जाकर सबसे पहले चेसिस और इंजन नंबर मशीन से गोदकर बदल देते थे। जो व्यक्ति अपने पुराने ट्रक या एक्सीडेंट के ट्रक बेचते थे उन ट्रकों को कबाड़ में काटने के बाद चोरी किए गए ट्रकों पर फर्जी चेसिस और इंजन नंबर बना देते थे। जिसके बाद न आरसी पकड़ में आती थी और ट्रक का चेसिस और इंजन नंबर भी पुलिस नहीं पकड़ पाती थी। उसके बाद ट्रकों की एनओसी और नया नंबर लेकर बेचने वाले ग्राहक के नाम पर आरटीओ ऑफिस के बाबू से साठगांठ कर ट्रांसफर कराते थे।
नशीला पदार्थ भी दिया
कालीचरण और अनस ने बताया कि वे प्रत्येक सप्ताह हरियाणा में जाते थे। जहां ट्रक सबसे अधिक रात में खड़े मिलते थे, वहां अपने को ट्रक चालक और क्लीनर बताकर वहां चाय या शराब पीते और खाना खाते थे। जिसका ट्रक ठीक कंडीशन में होता था उसके चालक को नशीला पदार्थ देकर उसके ट्रक को लूटकर फरार हो जाते थे।
आरोपियों के नाम पर भी ट्रक
बरामद एक ट्रक शहनवाज और एक ट्रक नौशाद के नाम पर बताया गया है, जिन्हें ट्रांसफर कराया गया है। एसपी देहात ने बताया कि गाजियाबाद की फोरेंसिक टीम से भी चेसिस नंबरों की जांच कराई गई है। जिससे खरीदने वाला व्यक्ति आरसी चेक कराए तो ट्रक के फर्जीवाड़े को पकड़ नहीं सके।