मेरठ। शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण और निलंबन के मामले में कोर्ट के निर्देश पर शासन ने गाइड लाइन जारी की है। जिसमें न्यायालय में लंबित आपराधिक मामलों पर अब वाद निस्तारण तक ही शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण जारी रहेगा। वहीं हर्ष फायरिंग के मामले में शस्त्र लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारी को निरस्तीकरण का अधिकार होगा।
शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण के कई मामले कोर्ट में चल रहे हैं। जिसमें लाइसेंस धारक ने निरस्तीकरण की कार्रवाई को चुनौती दी है। ऐसे ही कुछ मामलों को आधार बनाते हुए पिछले दिनों हाईकोर्ट ने शासन को निर्देश दिए थे। जिस पर शासन के सचिव भगवान स्वरूप द्वारा इस मामले में गाइड लाइन जारी करते हुए शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण या निलंबन के मामले में इनका पालन करने के आदेश दिए हैं।
ये दिए गए प्रमुख निर्देश
शासन ने कहा है कि शस्त्र प्राधिकारी शस्त्र लाइसेंस एक समयसीमा के लिए ही शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर सकता है। साथ ही निलंबन से पहले लाइसेंस धारक की सुनवाई भी की जाए, ताकि वह अपना पक्ष रख सके। मात्र किसी आपराधिक मामले का लंबित रहना शस्त्र लाइसेंस निरस्त या निलंबन करने का पर्याप्त अधिकार नहीं है। लेकिन यदि कोई विशेष अपराध या मामला है तो कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा शस्त्र निरस्तीकरण या निलंबन में पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई अमल में लाएं। ऐसे में यह जरूर देखा जाए कि क्या वास्तव में उक्त व्यक्ति के पास शस्त्र लाइसेंस रहने से आम जनता को शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था का खतरा है।
इस संबंध में सिटी मजिस्ट्रेट/शस्त्र लाइसेंस प्राधिकारी एमपी सिंह का कहना है कि शस्त्र लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण जिलाधिकारी के आदेश पर होता है। इसमें पूरी प्रक्रिया अपनायी जाती है। शस्त्र लाइसेंस धारक के संबंधित थाना के साथ ही पुलिस अफसरों की रिपोर्ट के बाद इस कार्रवाई को किया जाता है। हर्ष फायरिंग जैसे मामलों में पहले से ही यह दिशा निर्देश हैं।
खास बातें:
शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण को लेकर शासन ने जारी की गाइड लाइन
कोई केस दर्ज होना मात्र नहीं बनेगा स्थायी शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण का कारण