मेरठ। कुख्यात हिमांशु नरसी और धीरज ने बचपन में ही जरायम का पाठ पढ़ लिया था। स्कूल टाइम में एक छात्र पर नरसी ने जानलेवा हमला किया था। कुख्यात धीरज ने लूट, जानलेवा हमले की वारदात की थी। नौ साल पहले धीरज पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई हुई थी। जबकि नरसी को जुवेनाइल कोर्ट ने वर्ष 2011 में तीन साल के लिए बाल संप्रेक्षण गृह भेजा था।
कंकरखेड़ा एनकाउंटर में मारे दोनों कुख्यातों का एसटीएफ ने आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला। सीओ एसटीएफ बृजेश सिंह ने बताया कि नरसी शातिर अपराधी था। सन 2011 में नरसी ने स्कूल में एक छात्र पर जानलेवा हमला किया था। स्कूल ने नरसी को निकाल दिया था। उसके बाद नरसी ने अपराध की दुनिया में पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक लूट, हत्या और रंगदारी मांगने की वारदात करना उसका पेशा बन गया था। मोदीनगर पुलिस ने उसे पकड़कर जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट के आदेश पर वह तीन साल तक बाल संप्रेक्षण गृह में रहा था। उधर, कुख्यात धीरज का रिकॉर्ड भी कुछ ऐसा ही है। उसकी आपराधिक वारदातों को देखते 2009 में उस पर परतापुर थाना पुलिस ने गुंडा एक्ट लगायी थी। इससे पहले उसे भी बाल संप्रेक्षण गृह भेजा था।
पुलिस कस्टडी से भागा था नरसी
कुख्यात नरसी पुलिस कस्टडी से भी भागा था। सिविल लाइन क्षेत्र की सीताराम की पुलिया पर कुख्यात मोनू और सोनू अछरौंडा के साथ पुलिस पर हमला कर नरसी भी फरार हुआ था। हालांकि पुलिस ने नरसी को मौके से गिरफ्तार कर लिया था।
नरसी को टारगर बोलते थे बदमाश
कुख्यात नरसी अपराध की दुनिया का बादशाह बन चुका था। बदमाश उसे टाइगर के नाम से जानने लगे थे। गाजियाबाद या एनएच-58 पर लूट या हत्या होते ही पुलिस नरसी की तलाश में जुट जाती थी। पुलिस पर नरसी कई बार हमले कर चुका था।
भदौड़ा गैंग से जुड़ा था
पुलिस ने बताया कि नरसी भदौड़ा गैंग से भी जुड़ा था। कुछ दिन भदौड़ा गैंग के साथ मिलकर वारदातें कीं। योगेश भदौड़ा के जेल जाने के बाद नरसी ने अपना अलग गैंग बनाया। हाइवे पर लूट के दौरान हत्या करना ही उसका पेशा बन चुका था।