मेरठ। पश्चिम उत्तर प्रदेश में अपराधी सरकारी हथियारों से खून बहाते है। कुख्यात बलराज भाटी, योगेश भदौड़ा, मुकीम काला समेत एक दर्जन बदमाशों से पुलिस से छीने हथियार बरामद हुए हैं। हैरत है कि सरकारी हथियारों को पुलिस साबित नहीं कर सकी कि आखिर यह कहां से लूटे हैं। एनकाउंटर में मारे गए हिमांशु उर्फ नरसी से बरामद कारबाइन चंडीगढ़ लैब नहीं बता सकी कि आखिर यह कहां से लूटी थी। पुलिस अफसरों का दावा है कि सरकारी हथियारों पर लिखे नंबर को अपराधी खराद मशीन से मिटवा देते हैं। जिससे वह साबित न हो सके कि यह हथियार कहां से लूटे। जिसका फायदा अपराधी को ही मिलता है।
125 छीने सरकारी हथियार
मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत, शामली समेत वेस्ट यूपी के कई जिलों में बदमाशों ने हथियार छीने थे। पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले दस साल में 125 सरकारी हथियार छीनना बताया है। जिसमें कारबाइन ज्यादा हैं। इन्हीं हथियारों से अपराधी वेस्ट यूपी में खूनखराबा करते है। मुकीम काला ने कारबाइन से तीन सिपाहियों की हत्या की है। बलराज और सुंदर भाटी सरकारी हथियारों का प्रयोग करते थे।
नरसी को मिली थी कारबाइन
एनएच-58 पर दुल्हन महविश की बदमाशों ने लूटपाट के दौरान हत्या कर दी थी। दुल्हन की हत्या के आरोपी गाजियाबाद के बदमाश हिमांशु उर्फ नरसी उर्फ टाइगर और धीरज को एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया था। नरसी से कारबाइन बरामद हुई थी, जोकि सरकारी बताई गई। ये कारबाइन कहां से और कब लूटी थी, इसकी जांच के लिए कारबाइन को चंडीगढ़ लैब में भेजा था। लेकिन पता नहीं चल सका कि यह कारबाइन कहां से आई। एसएसपी राजेश कुमार पांडेय का कहना कि बदमाशों ने कारबाइन पर लिखे नंबरों को खराद की मशीन से मिटा दिया है। काफी प्रयास के बाद भी कारबाइन का नहीं पता चल रहा कि वह कहां से लूटी थी। पुलिस जांच में वह सरकारी कारबाइन बताई गई है।
खास बातें:
- एनकाउंटर में मारे गए हिमांशु उर्फ नरसी से मिली थी कारबाइन
- सरकारी हथियारों पर लिखे नंबर तक मिटा देते हैं अपराधी