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दहेज के 80 फीसदी मामलों में दुष्कर्म के आरोप फर्जी

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मेरठ। पुलिस की जांच में दहेज उत्पीड़न के अधिकांश मामलों में दुष्कर्म के आरोप गलत मिल रहे हैं। दहेज के मामलों में विवेचना के दौरान पुलिस ने परिवार परमर्श केंद्र पर पूर्व में की गई कांउसलिंग रिपोर्ट का भी मिलान किया। कई मामले परिवार परामर्श केंद्र पर पहुंचे। बाद में उनमें मुकदमा दर्ज कराया गया। सभी मामलों में पीड़ित महिलाओं के बयान भी मिलाए गए।

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पुलिस के अनुसार, एक जनवरी 2019 से 25 जून 2019 तक दहेज के 490 मामले सामने आए। अधिकांश मुकदमों में महिलाओं ने दहेज उत्पीड़न के साथ दुष्कर्म का भी आरोप लगाया। पीड़िता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की। संबंधित थानों की पुलिस ने मामलों में विवेचना की। इनमें महिला पुलिस के अलावा थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच भी शामिल रही।

दहेज उत्पीड़न के मामलों में परिवार परामर्श केंद्र पर काउंसलिंग की गई। समझौता नहीं होने पर संबंधित थानों में मुुकदमे दर्ज किए गये। जब इन मुकदमों की जांच की गई तो दहेज उत्पीड़न के साथ दुष्कर्म की भी धारा थी। 75 साल के ससुर पर भी कई मामलों में गंभीर आरोप लगाए गये थे, लेकिन जांच में आरोप गलत निकले। कई मामलों ऐसे थे जिनमें पीपीके में विवाद दहेज, मारपीट और मानसिक उत्पीड़न का था। लेकिन एफआआई दर्ज कराते समय दुष्कर्म के भी आरोप लगाए गये। पुलिस जांच में 80 प्रतिशत दहेज के मामलों में दुष्कर्म की धारा हटाकर पुलिस ने कार्रवाई की।
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कोट
दहेज के मामलों में विवेचक ने साक्ष्य के आधार पर ही विवेचना की है। दहेज के मुकदमों में दुष्कर्म के आरोप सही नहीं मिलने पर ही मामलों से दुष्कर्म की धारा हटाई गई है। जो आरोप सही पाया जाता है, उसी में कार्रवाई की जा रही है। - नितिन तिवारी, एसएसपी

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