सहारनपुर समेत अन्य केंद्रों के ध्यानार्थ===
- गिरफ्तारी की सूचना पाकर मेरठ पुलिस से मिलने पहुंचे दो पीड़ित परिवार
- जागी न्याय की उम्मीद, एसएसपी नितिन तिवारी से आज करेंगे मुलाकात
मेरठ।
राज्यमंत्री बनवाने का सपना दिखाकर लोगों से लाखों की ठग करने वाला राजकुमार कर्णवाल व उसके गिरोह की गिरफ्तारी के बाद उनकी कारगुजारी के नये-नये मामले सामने आने लगे हैं। ताजा मामला मेडिकल में प्रवेश से जुड़ा है। राजकुमार दो लोगों से मेडिकल में प्रवेश के एवज में एक करोड़ 25 लाख रुपये ठग चुका है। बुधवार दोपहर दो पीड़ित परिवार पुलिस ऑफिस पहुंचे। ये लोग बृहस्पतिवार को एसएसपी नितिन तिवारी से मुलाकात करेंगे।
सहारनपुर शुगर मिल में बतौर यूनिट हेड तैनात रहे विजयपाल सिंह ने बताया कि वर्ष-2015 में उनके बच्चे ने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। बच्चे को पीजी में प्रवेश दिलाना था। तभी उनके विभागीय कर्मचारी नरेश ने उनकी मुलाकात राजकुमार कर्णवाल से कराई। राजकुमार ने भरोसा दिलाया कि वह उनके बच्चे का जौलीग्रांड देहरादून में पीजी आर्थोपेडिक में प्रवेश करा देगा। उनके बेटे के दोस्त ने भी प्रवेश की इच्छा जाहिर की और उसे भी राजकुमार से मिला दिया। 60-60 लाख में एडमिशन की बात पक्की हो गई। पांच-पांच लाख की पहली किश्त उन्होंने राजकुमार को दी। 15 दिसंबर 2015 में उन्होंने दोनों बच्चों के प्रवेश के लिए 60-60 लाख रुपये दे दिए। करीब 10 दिन बाद पांच लाख रुपये और मांगे, जो उन्होंने राजकुमार के एकाउंट में ट्रांसफर किए।
मंत्री कोटे से एडमिशन का दिया भरोसा
विजयपाल सिंह के अनुसार, राजकुमार ने मंत्री कोटे से एडमिशन का भरोसा दिलाया था। इसी बीच वह उसके घर भी पहुंचे, जहां हरीश रावत, अमर सिंह, त्रिवेंद्र रावत सरीखे नेताओं के साथ उसके फोटो देख किसी तरह का शक नहीं हुआ। राजकुमार दो महीने तक एडमिशन के लिए टरकाता रहा। फिर कहने लगा कि उसके केतन देसाई से अच्छे संबंध हैं। वह एमसीआई से एप्रूवल दिलाकर सीटें बढ़वा रहा है।
आरोपी के दिए दोनों चेक हुए बाउंस
विजयपाल सिंह ने बताया कि एक करोड़ 25 लाख रुपये राजकुमार को सौंपने के बाद वह समय-समय पर उससे मुलाकात करते रहे। कई बार फोन पर पैसे लौटाने को लेकर बहस भी हुई। दिसंबर 2016 में उसने उन्हें 60 लाख और 65 लाख के दो चेक सौंपे। चेक उन्होंने एकाउंट में लगाए तो बाउंस हो गये। इतना सब कुछ होने के बावजूद राजकुमार उनसे मुलाकात कर भरोसा दिलाता रहा। बाद में उसने दो-दो लाख करके सारे पैसे लौटाने का आश्वासन दिया। दो जून को उसे पहली किश्त देनी थी, लेकिन उससे पहले ही वह दबोच लिया गया।