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दलित युवक की मौत पर गुस्साएं ग्रामीणों ने लगाया जाम

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मवाना। जानलेवा हमले में गंभीर रूप से घायल ग्राम मीवा निवासी दलित युवक ने मंगलवार देर रात उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर थाने पहुंचे ग्रामीणों के साथ पुलिस ने अभद्रता की। जिससे गुस्साए ग्रामीणों ने मीवा-जयसिंहपुर मार्ग पर जाम लगा दिया और अधिकारियों को बुलाने की जिद पर अड़ गए। मौके पर पहुंची कई थानों की फोर्स एवं पीएसी ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। एसपी देहात के आश्वासन पर ग्रामीणों ने जाम खोला।
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मीवा गांव निवासी दलित भानू पुत्र रोहताश को तीन दिन पहले उसके साथी नवाब, नीरज यादव, कपिल उर्फ बादल एवं एक अज्ञात शराब पिलाने के लिए ले गए थे। भानू देर शाम सड़क किनारे बेहोशी की हालत में पड़ा मिला। सूचना पाकर पहुंची पीआरवी ने उसे सीएचसी में भर्ती कराया था। वहां से उसे मेरठ के लिए रेफर कर दिया था। भानू ने मंगलवार देर रात उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। जिस पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजन एवं ग्रामीण बुधवार सुबह मोर्चरी से शव लेकर थाने पहुंचे। आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने उनसे अभद्रता की। जिस पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और थाने के सामने जाम लगा दिया। पुलिस ने उन्हें वहां से भगा दिया। इस पर ग्रामीण शव को लेकर गांव पहुंचे और मीवा-जयसिंहपुर मार्ग पर जाम लगा दिया। इसकी सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। इस दौरान उनकी पुलिस में नोकझोंक भी हुई। ग्रामीण उच्चाधिकारियों को मौके पर बुलाने की जिद पर अड़ गए। इस दौरान कई थानों की फोर्स एवं पीएसी भी पहुंच गई। इसकी जानकारी पाकर एसडीएम मवाना अंकुर श्रीवास्तव एवं सीओ यूएन मिश्रा भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। ग्रामीण डीएम एवं एसएसपी को बुलाने की मांग कर रहे थे। करीब दो घंटे बाद एसपी देहात राजेश कुमार मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने ग्रामीणों को तीन दिन में हत्यारोपियों को गिरफ्तार करने का आश्वासन देकर जाम खुलवाया।
एसपी देहात की तरफ फेंकी चूड़िया
जाम की सूचना पाकर पहुंचे एसपी देहात राजेश कुमार की तरफ जाम में शामिल महिलाओं ने चूड़िया फेंकीं और पुलिस पर लापरवाही एवं दलितों का उत्पीड़न करने का आरोप लगाया। इस पर एसपी देहात भड़क उठे। उन्होंने फोर्स को वापस चलने को कहा। हालांकि कुछ गण्यमान्य व्यक्तियों ने मामले को संभाला और ग्रामीणों एवं महिलाओं को शांत कराया।
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बुझ गया इकलौता चिराग
भानू अपने पिता रोहताश का इकलौता चिराग था। भानू से बड़ी दो बहने हैं। उनकी शादी हो चुकी है। पिता रोहताश वृद्ध होने के चलते अक्सर घर पर ही रहता है और भानू मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण कर रहा था। भानू की मौत से इकलौता सहारा छिन गया। इस पर पिता एवं बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
गांव में नहीं जले चूल्हे
भानू की मौत के बाद मीवा गांव के चूल्हे नहीं जले। दलितों में हत्या के चलते इस कदर आक्रोश था कि वे हत्यारोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। आरोप था कि पुलिस ने जानलेवा हमले के बाद से ही घटना को गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस ने जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज कर इतिश्री कर ली थी। यदि पुलिस चाहती तो उसी दिन आरोपियों के घर दबिश देकर उन्हें गिरफ्तार कर सकती थी।
हत्यारोपियों की तीन दिन में गिरफ्तारी के आश्वासन पर जाम खुलवाया। वहीं, जानलेवा हमले का मुकदमा हत्या में तरमीम कर दिया जाएगा। हत्यारोपी जल्द ही पुलिस की गिरफ्त में होंगे।-राजेश कुमार, एसपी देहात
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मुख्य बातें
थाना पुलिस पर लगाया अभद्रता करने का आरोप
ग्रामीणों को समझाने पहुंचे एसपी देहात की तरफ महिलाओं ने फेंकीं चूड़ियां
हत्यारोपियों को शीघ्र गिरफ्तार करने के आश्वासन पर शांत हुए ग्रामीण
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