मेरठ। किशोरी की अपहरण के बाद हत्या के मामले में एसएसपी ने शुक्रवार को भावनपुर थाने के दरोगा राजेंद्र सिंह को सस्पेंड कर दिया। वहीं, पुलिस दूसरे दिन भी खाली हाथ रही। एसपी देहात राजेश कुमार ने गांव पहुंचकर किशोरी के परिजनों को आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया। पुलिस ने आरोपी पक्ष के तीन रिश्तेदारों को हिरासत में लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने पर बिसरा सुरक्षित रखा गया है।
पुलिस के अनुसार अब्दुल्लापुर निवासी शोभा की 14 फरवरी को अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। उसका शव बृहस्पतिवार को गंगासागर के खंडहर पड़े मकान से बरामद हुआ था। किशोरी की हत्या में गांव के देवेंद्र, दीपक, धर्मपाल और उसकी पत्नी उर्मिला के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। पुलिस ने नामजद आरोपी देवेंद्र के भाई राजपाल, धर्मपाल की रिश्तेदार महिला समेत तीन लोगों को हिरासत में ले रखा है। सीओ सदर देहात विजय प्रकाश ने इनसे पूछताछ की। इस दौरान कुछ लोगों ने विरोध करते हुए कहा कि पुलिस दबिश के नाम पर उत्पीड़न कर रही है। एसपी देहात राजेश कुमार ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर दबिश दी जा रही है। पोस्टमार्टम में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है। मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने पर बिसरा जांच के लिए भेजा जाएगा।
पुलिस की रही बड़ी लापरवाही
किशोरी की अपहरण के बाद हत्या के मामले में एसओ भावनपुर आशुतोष कुमार के साथ थाना पुलिस की लापरवाही सामने आ रही है। एसएसपी ने सीओ सदर देहात और एसओ भावनपुर पर बृहस्पतिवार को ही जांच बैठा दी थी। किशोरी के परिजनों की तहरीर पर न तो केस दर्ज हुआ और पूरे मामले में एसओ ने न तो एसपी देहात को जानकारी दी और न ही एसएसपी को। जब किशोरी का शव मिला तो एसओ पूरे मामले में गुमराह करने में लगे रहे। आशुतोष कुमार पहले भी विवादों में रहे हैं। जांच में सामने आया कि भावनपुर पुलिस ने नामजद आरोपी धर्मपाल को उसकी पत्नी बीमार बताते हुए छोड़ दिया। जिसमें पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाए थे कि पुलिस ने आरोपी को साठगांठ कर छोड़ा है।