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क्राइम पर कंट्रोल नहीं, मैनेजमेंट में जुटी पुलिस

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मेरठ। जिले में सिलसिलेवार हत्याएं हो रही हैं। क्राइम को कंट्रोल करने की बजाय पुलिस मैनेजमेंट में जुटी है। पुलिस अधिकारियों की खामोशी से नतीजे और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।
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मेरठ पुलिस हत्यारोपियों को गिरफ्तारी सिर्फ सेटिंग से कर रही है। नतीजा सबके सामने है। बदमाशों में पुलिस का खौफ नहीं है। हत्या के बाद हत्या हो रही है और पुलिस मजबूत कार्रवाई नहीं कर सकी। नामजद आरोपी हत्थे नहीं चढ़ते तो फिर पुलिस सेटिंग से उनको गिरफ्तार करती है। परतापुर के सोहरका गांव में दोहरे हत्याकांड में पुलिस एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी। हसनपुर रजापुर में सावित्री की हत्या में नामजद आरोपी खुद सरेंडर हुए। पुलिस और हत्यारोपी में खूब मैनेजमेंट चला।
सावित्री के दामाद बबलू की हत्या में मंगलवार को भरी कचहरी में पुलिस फोर्स की मौजूदगी में दो आरोपी अतुल और कुलदीप सरेंडर हो गए। सवाल उठता कि जब पुलिस सेटिंग से हत्यारोपियों को सरेंडर या गिरफ्तार करेगी तो क्राइम कंट्रोल कैसे होगा। यही वजह है कि जिले में पुलिस मौत का तमाशा देख रही है। हालत ऐसे रहे तो वो दिन दूर नहीं, जब लोगों का गुस्सा पुलिस पर फूटेगा। कानून व्यवस्था की तो मेरठ में धज्जियां उड़ रही हैं। कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
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तीसरा हत्यारोपी कौन?
परतापुर के सोहरका गांव में भोलू और निछत्तर कौर पर सरेआम गोलियां बरसाने वाले तीन आरोपी सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए थे। मांगे उर्फ विनय जेल चला गया। विकास जाट मुजफ्फरनगर पुलिस द्वारा एनकाउंटर में मारा गया। तीसरा आरोपी फुटेेज में साफ दिख रहा है। लेकिन उसका नाम पता लगाने में मेरठ पुलिस फेल हो गई। 21 दिन बीतने के बाद भी पुलिस खाली हाथ है। अब पुलिस फिराक में लगी है कि कोई तीसरे आरोपी का नाम बता दे तो वह उसको गुपचुप तरीके से सरेंडर करा देगी।
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- पुलिस अधिकारियों की खामोशी से बिगड़ा जिले का माहौल
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