मेरठ। मेडिकल इमरजेंसी में एक युवती की मौत पर मंगलवार को जमकर बखेड़ा हुआ। परिजनों और भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए चिकित्सकों को घेर लिया। मेडिकल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। डेंगू से मौत होने का भी शोर मचा। प्रमुख अधीक्षक ने लोगों को समझाकर शांत किया।
देवबंद निवासी मोनिका को मंगलवार सुबह छह बजे मेडिकल इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। मेडिकल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी का कहना है कि मरीज रेफर होकर यहां लाया गया था। उसमें दिमागी बुखार जैसे लक्षण थे। उसके प्लेटलेट्स काफी कम (17 हजार) थे और हीमोग्लोबिन की मात्रा दो के आसपास रह गई थी। उसे प्लेटलेट्स चढ़ाए गए। लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ और शाम करीब 4:40 बजे उसकी मृत्यु हो गई।
परिजनों ने काटा हंगामा
मौत की सूचना पर परिजनों और अन्य लोगों ने हंगामा कर दिया। परिजनों और लोगों का आरोप था कि मोनिका की मां ने एक चिकित्सक के पैर पकड़कर बेहतर इलाज के लिए कहा। इस पर चिकित्सक का कहना था कि वे बेहतर इलाज दे रहे हैं। अगर इलाज सही नहीं लग रहा तो मरीज को प्राइवेट में ले जा सकते हैं। उनका आरोप था कि इलाज में लापरवाही बरती गई, जिससे उसकी मौत हुुई है। मौके पर कार्यकर्ताओं के साथ भाजयुमो नेता यश गुप्ता ने प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी से बात की। डॉ. चौधरी ने बताया कि इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती गई है, न ही किसी चिकित्सक की इसमें कोई गलती है। मोनिका के परिजनों ने भी कोई लिखित शिकायत नहीं की है। हंगामा करने में यूनिवर्सिटी के छात्र भी थे।
सीएमओ ने बताया अफवाह
दूसरी तरफ, मेडिकल में यह भी शोर मचा कि मोनिका की मौत डेंगू की वजह से हुई है। लेकिन सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना है कि युवती को मेरठ में डेंगू की कोई पुष्टि नहीं हुई थी। न ही उसका यहां कोई टेस्ट हुआ था। मेरठ में डेंगू से मौत की बात अफवाह है। इस संबंध में पूरी जानकारी कर ली गई है।
खास बात
- युवती की मां ने पकड़े चिकित्सक के पैर, कहा बेटी को बचा लो
- चिकित्सक ने कहा, यहां सही नहीं लग रहा तो प्राइवेट में ले जाओ
- डेंगू से मौत का भी शोर मचा, सीएमओ ने किया इंकार
- हीमोग्लोबिन की मात्रा रह गई थी दो, प्लेटलेट्स थे 17 हजार