बेटी की इज्जत बचाने में जिंदा जल गया बेटा
जलालपुर जोरा गांव की घटना
1993 में अपने पिता की हत्या के मामले में जेल जा चुका है आरोपी वृद्ध
झोपड़ी में आग लगाने के बाद भी आरोपी करता रहा पुत्रवधू का इंतजार
ग्रामीणों के आने के बाद ही खेत से बच्ची को लेकर निकली महिला
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर शहर से लेकर देहात तक महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए तमाम कार्यक्रम हुए। लेकिन महिला दिवस पर दिन निकलने से पहले ही एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने समाज को कलंकित कर दिया। यह घटना हस्तिनापुर थाने में दर्ज हो चुकी है। पीड़ित महिला ने छह साल की बेटी की इज्जत तो ससुर से बचा ली, लेकिन बेटी को बचाने में पांच साल के मासूम बेटे को खो दिया।
पांच साल का मासूम झोपड़ी में जिंदा जलता रहा और उसका दादा शराब के नशे में पुत्रवधू पर नजरें गड़ाए बैठा रहा। झोपड़ी धू-धू कर जल रही थी। महिला ने बेटे को बचाने के लिए शोर भी मचाया, लेकिन वह खेत से नहीं निकली। वजह उसे अपनी और बेटी की इज्जत भी बचानी थी। वह खेत से निकलती तो आरोपी वृद्ध उनकी जान भी ले सकता था। 40 मिनट तक झोपड़ी जलती रही। जब तक ग्रामीण मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया। मासूम की जलकर मौत हो गई। सूचना पर यूपी 100 पुलिस और एसओ हस्तिनापुर धर्मेंद्र कुमार पहुंचे। उन्होंने बच्चे का शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
1991 में की पहली हत्या
जलालपुर जोरा गांव के जिस आरोपी वृद्ध को पुलिस ने पोते को जिंदा जलाने के मामले में गिरफ्तार किया है, उसका अपराध से पुराना नाता रहा है। एसपी देहात अविनाश पांडेय की जांच में पता चला कि 1991 में इसी आरोपी ने गांव निवासी व्यक्ति की एलानिया हत्या की थी। पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया। पिता ने जमानत में मदद नहीं की तो 1993 में पिता को भी मौत के घाट उतार दिया। उसके बाद पुलिस ने फिर से जेल भेज दिया। आरोपी पर 2018 में आर्म्स एक्ट का मुकदमा हुआ। आरोपी पर नौ मुकदमे दर्ज हैं।
रासुका में होगी कार्रवाई
एसपी देहात अविनाश पांडेय का कहना है कि आरोपी का अपराधिक रिकार्ड है। मुकदमा लिखकर गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी के खिलाफ कड़े साक्ष्य कोर्ट में पेश किए जाएंगे। उस पर रासुका के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।