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कच्ची शराब नहीं, पक्का जहर बोलो

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कच्ची शराब नहीं, पक्का जहर बोलो
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सहारनपुर। छोटी पॉलीथिन में भरकर बेची गई शराब ने 16 गांवों में कहर बरपाया है। हर गांव में एक जैसी ही शराब (पाउच वाली) सप्लाई हुई, जिसका जाम लोगों ने पिया तो उनकी जुबां हमेशा के लिए खामोश हो गई। शराब कहां से आई, उससे महत्वपूर्ण बात यह है कि इतने गांवों में एक ही जैसी शराब परोसने वाला माफिया आखिर कौन हैं, जो अब तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा। ना चौकी वालों को खबर लगी, न वरिष्ठ अफसर ही सजग रहे, और जहरीली शराब ने घरों को बर्बाद कर दिया। अहम सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में मौत का असल जिम्मेदार कौन है। वरिष्ठ अधिकारी भी इसकी जवाबदेही के उतने ही जिम्मेदार हैं, जितनी जिम्मेदारी निचले स्तर के कर्मियों की होती है। शासन स्तर से लगातार वरिष्ठ अधिकारियों को इसके निर्देश दिए जाते हैं कि अवैध धंधे करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
शराब माफिया को कहां से मिलता है मिथाइल
मौत बांटने वाली शराब में मिथाइल एल्कोहल और एथेनॉल मिलाए जाने की आशंका जताई जा रही है। गांवों में चोरी छिपे से शराब बनाने वाले जो माफिया सक्रिय हैं, उनका बड़ा नेटवर्क इस धंधे में लगता है, जो शराब बनाने में प्रयोग होने वाले केमिकल और अन्य सामान उपलब्ध करा देता है। चर्चा है कि शुगर मिल से निकलने वाले इथाइल अल्कोहल के अलावा मिथाइल एल्कोहल का प्रयोग अवैध रूप से शराब बनाने में किया जाने लगा है। खास बात यह है कि मिथाइल एल्कोहल और इथाइल इन माफियाओं को आखिर मिलता कहां से हैं, कौन इस नेटवर्क के पीछे शातिर। कच्ची शराब बनाने के हैं कई तरीके
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जानकारों की मानें, तो गांवों में कच्ची शराब कई प्रकार से बनाई जाती है। इनमें एक तरीका पुराने गुड़ और फलों को सड़ाकर उससे शराब बनाते हैं। उससे तैयार होने वाले लहन को गर्म करके शराब बनाई जाती है। इसके अलावा एथेनॉल की 200 मिलीलीटर मात्रा से करीब 20 बोतल तक बना लेते हैं, जबकि एक और खतरनाक तरीके ऑक्सीटोसिन जैसे इंजेक्शन के इस्तेमाल शराब बनाने का भी बताया जा रहा है।
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ठेकों पर मिलने वाली शराब में निर्धारित होती है मात्रा
डिस्टिलरी से बनने के बाद ठेकों तक पहुंचने वाली शराब में एल्कोहल की मात्रा का निर्धारण होता है। एल्कोहल की कितनी मात्रा है, उसका उल्लेख भी बोतल, अद्धे और पव्वे पर होता है। निर्धारण के मुताबिक बीयर में 8 प्रतिशत, रम में 42.8 प्रतिशत और व्हिस्की में भी एल्कोहल की 42.8 प्रतिशत मात्रा होती है। देशी शराब में तीन प्रकार से एल्कोहल की मात्रा होती है, जो उसके दाम को भी निर्धारित करती है। 25 डिग्री वाली देशी शराब का पव्वा (200मिली) 45 रुपये, 36 डिग्री वाला 65 रुपये और 42 डिग्री वाला पव्वा 75 रुपये में बेचा जाता है।
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