मेरठ। 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी भावेश कुमार सिंह वर्ष 2013 में मेरठ के आईजी जोन रहे। उनका कहना कि मेरठ जोन में कई बार सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी। इसको लेकर पुलिस ने आम जनता के साथ गांवों और शहर में मीटिंग की। ताकि दोनों समुदाय के लोग सौहार्द बनाए रखें। राजनीतिक दबाव को नजरअंदाज कर हमेशा कानून व्यवस्था पर काम किया।
उन्होंने बताया कि धार्मिक स्थलों पर लाउड स्पीकर लगाकर मेरठ में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति कई बार बनी। लेकिन पुलिस ने गणमान्य लोगों के सहयोग से इस मामले को निपटाया। हत्या और अपहरण के मामलों में भी कई बार हालात खराब होने के आसार बने। कई ऐसे मामले रहे जिसमें वे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति को संभाला।
मुजफ्फरनगर दंगे से एक दिन पहले 27 अगस्त 2013 को मेरठ जोन से उनको हटाया गया। दंगे के बाद भावेश कुमार को माहौल देखते फिर से मेरठ जोन में भेजा गया। जहां पर मुजफ्फरनगर को छोड़कर आसपास के जिलों मेरठ, शामली, बागपत, हापुड़ और सहारनपुर में उनकी सहायता ली गई। गांवों और शहरों में लोगों के साथ मीटिंग कर हालात को सामान्य कराने में उनकी बेहतर भूमिका रही। भावेश कुमार वर्तमान में उत्तर प्रदेश में ही डीजी इंटेलीजेंस के पद पर तैनात हैं।