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अब हाथोंहाथ पता चलेगा चोरी की गाड़ी का असली चेसिस नंबर

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मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर में वाहन चोरों और चोरी की गाड़ियों का अवैध धंधा करने वालों पर नकेल कसने की तैयारी है। मेरठ जोन को बृहस्पतिवार को अत्याधुनिक संसाधनों से लैस व्हीकल चेसिस आईडेंटीफिकेशन सिस्टम (वीसीआईएस) मोबाइल वैन मिल गई। एडीजी जोन प्रशांत कुमार के अनुसार इस सिस्टम से महज 15 मिनट में चोरी की गाड़ी का असली चेसिस नंबर पता चला जाएगा।
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यह है स्थिति
वेस्ट यूपी के जिलों में पलक झपकते ही कार और बाइक चोरी हो जाती हैं। जोन में रोजाना करीब 500 वाहन चोरी होते हैं। सोतीगंज समेत कई जिलों में चोरी के वाहनों का कमेला चल रहा है। जहां गाड़ी चोरी करने के बाद उसका इंजन व चेसिस नंबर बदलकर फर्जी कागजों पर उसे बेचने वाला गिरोह सक्रिय है। अधिकांश मामलों में पुलिस गाड़ी का प्रॉपर वेरीफिकेशन नहीं करा पाती। जिसके चलते ऐसे लावारिस वाहनों के थानों में ढेर लगे हैं।
अब मिली स्पेशल वैन
एडीजी जोन प्रशांत कुमार ने बताया कि शासन से जोन पुलिस जो स्पेशल वैन मिली है, उसे व्हीकल चेसिस आईडेंटीफिकेशन सिस्टम यानी सचल चेसिस पहचान सिस्टम मोबाइल वैन नाम दिया गया है। इस गाड़ी में इलेक्ट्रिक मैगनेटिक डिवाइस, स्प्रे मैगनेटिक फ्लोरोसेंट, यूवी लाइट, अल्ट्रा व्हाइट लाइट व कैमरों समेत अन्य अत्याधुनिक उपकरण लगे हैं।
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ऐसे होगा असली नंबर सर्च
वाहन चोर गाड़ी के असली चेसिस नंबर को बदलकर उस पर नया नंबर डाल देते हैं। कई केसों में यह चेसिस नंबर घिसा हुआ होता है। इंजन और चेसिस नंबर पर इलेक्ट्रिक मैगनेटिक डिवाइस लगाई जाएगी। उससे बाद स्प्रे (मैगनेटिक फ्लोरोसेंट) किया जाएगा। फिर यूवी लाइट से उसे जांचा जाएगा। इससे चोरों द्वारा डाला गया फर्जी नंबर और असली नंबर दिखने लगेगा। उसके बाद मोटर व्हीकल कोऑर्डिनेशन सिस्टम (ऑनलाइन सॉफ्टवेयर) पर गाड़ी का असली रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर पता लगेगा कि गाड़ी का मालिक कौन है और यह गाड़ी कहां से चोरी हुई है। इस प्रक्रिया में करीब 15 मिनट का समय लगेगा।
पहले क्या करते थे
इंजन और चेसिस का असली नंबर पता लगाने के लिए पहले केमिकल डालते थे। जिससे मैगनेट खराब हो जाता था और नंबर सर्च नहीं होता था।
अभी इसमें लेंगे मदद
एडीजी के अनुसार पहले चरण में इस वैन का प्रयोग जोन के प्रत्येक थाने में खड़े लावारिस वाहनों के असली नंबर और वाहन स्वामी का पता लगाने में होगा।
अब एफआईआर में नंबर अनिवार्य
चोरी की गाड़ी की रिपोर्ट दर्ज करते समय पुलिस अक्सर चेसिस और इंजन नंबर नहीं लिखती। लेकिन अब एडीजी ने निर्देश दिए हैं कि ऑनलाइन एफआईआर में पुलिस चेसिस और इंजन नंबर को जरूर दर्ज करे। ताकि वह ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में सामने आ सके।
एक्सपर्ट ने किया डेमो
बृहस्पतिवार दोपहर एडीजी जोन ऑफिस में शहर के थाने से चोरी की दो गाड़ी मंगाई गईं। वैन पर तैनात दरोगा देवराज सिंह और एक्सपर्ट शफीक ने एडीजी के सामने ही इनका असली चेसिस बताकर इनके मालिक का पता भी निकाल लिया।
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खास बात
- मेरठ जोन को मिली व्हीकल चेसिस आईडेंटीफिकेशन सिस्टम (वीसीआईएस) से लैस मोबाइल वैन
- एडीजी ने कहा, इसके माध्यम से कसा जा सकेगा एनसीआर के वाहन चोरों पर शिकंजा
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