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सीएमओ कार्यालय से जुड़े जालसाजों के तार

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सिपाही भर्ती में सेंधमारी मामला
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- सीएमओ ने एक चिकित्सक को ड्यूटी से हटाया
- दो बाबुओं की भूमिका भी मानी जा रही संदिग्ध
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। सिपाही भर्ती में सेंधमारी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस भर्ती प्रक्रिया में जालसाजों के तार सीएमओ कार्यालय से जुड़ते प्रतीत हो रहे हैं। सीएमओ ने भर्ती प्रक्रिया में शामिल में एक चिकित्सक को भी पैनल से हटा दिया है। हालांकि उसके खिलाफ अभी कोई एफआईआर दर्ज नहीं है। लेकिन उसकी भूमिका को लेकर संदेह होने के कारण ऐसा किया गया है।
दूसरी तरफ, सीएमओ कार्यालय के ही दो बाबुओं की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। अगर पुलिस जांच में उनके खिलाफ कोई सुुबूत मिलते हैं तो फिर सीएमओ कार्यालय से उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस मामले को लेकर मंगलवार से ही सीएमओ कार्यालय में चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना है कि अभी पुलिस की तरफ से किसी बाबू की भूमिका की जानकारी उन्हें नहीं दी गई है। अगर पुलिस की तरफ से कोई सूचना मिलती है तो विभागीय जांच कराई जाएगी और इस गोरखधंधे में अगर भूमिका पाई जाती है तो उनके निलंबन के लिए भी शासन को लिखा जाएगा।
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पुलिस भर्ती में सेंधमारी के लिए मेडिकल टेस्ट का सहारा लिया जा रहा है। पुलिस ने इस मामले में मंगलवार को एक आरोपी को गिरफ्तार किया था, जिसने पूछताछ में खुलासा किया था कि सीएमओ कार्यालय के दो बाबुओं की फोन कॉल पर वह अब तक 12 अभ्यर्थियों से वसूली कर चुका है।
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पहले भी मिली है भूमिका
पिछले साल सीएमओ कार्यालय के एक सीनियर बाबू को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। वह एक नर्सिंग होम के संचालकों पर दबाव बना रहा था। एंटी करप्शन विभाग से शिकायत की गई थी तो बाबू पकड़ में आया था। उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इसके अलावा सीएमओ कार्यालय के बाहर ही सीएमओ की कार के चालक ने झगड़ा होने पर एक चिकित्सक को गोली मार दी थी।
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