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आखिर कब तक जान लेता रहेगा यह फ्लाईओवर

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मेरठ। परतापुर फ्लाईओवर आखिर कब तक लोगों की जान लेता रहेगा। यहां पता नहीं कब किसी जान चली जाए। हर बार हादसे के बाद सरकारी सिस्टम खामोश रहता है। पिछले पांच साल में एक दर्जन लोगों की फ्लाईओवर से नीचे गिरकर जान जा चुकी है। कभी भी सरकारी तंत्र ने मौके पर पहुंचकर यह जानने की कोशिश नहीं की कि आखिर इसी जगह हर बार हादसे क्यों होते हैं।
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मेरठ से दिल्ली की तरफ जाते समय जैसे ही परतापुर फ्लाईओवर पर वाहन चढ़ते हैं, तो ऊंचाई के साथ इस फ्लाईओवर पर तीव्र घुमाव है। जिसके चलते दिन में कई बार गंभीर हादसे हुए हैं तो रात में कोहरा या धुंध के चलते बड़ा हादसा होने की संभावना बनी रहती है। वैसे भी सड़क अच्छी होने के कारण वाहनों की स्पीड भी यहां कम नहीं रहती, जो हादसे होने का सबसे बड़ा कारण है। फ्लाईओवर पर रेलिंग भी मानक के अनुसार नीची है, ऐसे में कोई भी दोपहिया या चौपहिया वाहन घुमाव के समय रेलिंग से टकराकर नीचे ही गिरता है। सबसे ज्यादा हादसे भी रात के समय दोपहिया वाहन चालकों के साथ होते हैं।
सोमवार रात बाइक सवार तीन युवकों की मौत से एक बार फिर परतापुर फ्लाईओवर पर सवाल उठने खड़े हो गए हैं। एक माह पहले नोएडा निवासी युवक बाइक समेत फ्लाईओवर से नीचे गिर गया था। हेलमेट से युवक की जान तो बच गई थी। लेकिन गंभीर चोट लगी थी। जनवरी 2017 में गाजियाबाद निवासी युवक की बाइक समेत नीचे गिरने से मौत हो गई थी। दो साल पहले भी दो युवकों की मौत इसी स्थान से गिरने से हुई थी। कई बार यहां से बाइक सवार झाड़ियों में गिरने से बचे भी हैं।
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फ्लाईओवर पर हादसे की ये खास वजह:
- मेरठ से दिल्ली की तरफ पुल पर चढ़ते समय तीव्र घुमाव, वाहन की ज्यादा स्पीड है खतरनाक
- फ्लाईओवर की रेलिंग नीची होने के कारण दोपहिया वाहन चालक पुल से नीचे गिर जाता है।
- एक स्थान पर रेलिंग भी टूटी हुई है, यह भी लापरवाही का कारण है।
- फ्लाईओवर पर लोहे का जाल भी नहीं लगा हुआ है, जाल होता तो जान नहीं जाती।
- रात में एक साइड में अंधेरा रहना भी हादसे का कारण है।
- ट्रैफिक पुलिस या हाईवे अथॉरिटी ने रात में या कोहरे से बचाव में कोई रिफ्लेक्टर नहीं लगा रखे हैं
खास बात
- पांच साल में एक दर्जन लोगों की जा चुकी पुल से गिरकर जान
- हर हादसे के बाद खामोश रहता है सरकारी सिस्टम
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