पुलिस की मुखबिरी ,फर्जी नामजदगी बनी हत्या की वजह
दशक पहले की दोस्ती में शादी के दिन पड़ी थी दरार, एक दूसरे के बन गए दुश्मन
पार्षद बनने के बाद नेताओं से बढ़ी नजदीकी, थानों में पैठ
मेरठ। आरिफ की हत्या के पीछे पुरानी रंजिश और पुलिस की मुखबिरी भी एक वजह मानी जा रही है। माना जा रहा है कि अपने प्रभाव से विरोधियों को एक के बाद एक मुकदमों में फंसाने की वजह से भी फाइक और सारिक खार खाए बैठे थे और 15 दिन से हत्या कराने की फिराक में थे।
पुलिस के अनुसार इस वारदात में इस्माइल नगर के ही फाइक और सारिक का नाम आ रहा है। दोनों पक्ष पहले एक ही थे। दोनों में अच्छी उठ बैठ थी। दोनों एक साथ मिलकर प्रापर्टी का काम भी करते थे। करीब सात साल पहले फाइक के भाई सद्दाम की शादी थी। शादी के दौरान गोली चलने से सद्दाम की मौत हो गई थी। फाइक पक्ष को शक था कि इस वारदात में आरिफ पक्ष का हाथ है तभी से दोनों पक्षों में खटास शुरू हो गई और धीरे धीरे से रंजिश में बदल गई।
फाइक उसका भाई सारिक शूटर हैं सारिक पक्ष का नाम बेकरी कांड में भी चर्चाओं में आया था। इन पर कई मुकदमे भी हैं। उधर आरिफ का भाई सलमान हिस्ट्रीशीटर है और अपराध की दुनिया में उसका खासा नाम है। दोनों ही पक्ष प्रापर्टी की खरीद फरोख्त करते हैं । अपनी ताकत के बूते इस धंधे में भी दोनों पक्षों की एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश रहती है।
इसी तनातनी के चलते आरिफ ने पांच साल पहले वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ा और जीत गया। बाद में वह सपा से जुड़ गया। कई नेताओं से संपर्क बढे़ जिस कारण उसकी पुलिस से भी नजदीकी बढ़ गई। अपने इस प्रभाव से उसने फाइक पक्ष के लोगों पर कई मामले दर्ज कराए।
एएसपी रणविजय सिंह के अनुसार लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र में शेरी मर्डर केस में आरिफ ने पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाकर फाइक सहित उसके पांच भाइयों के नाम नामजद रिपोर्ट करा दी बाद में जांच में वह सभी बेकसूर मिले। शेरी की मां ने खुद आकर गलत नामजदगी पर अपनी भूल मानी थी। बकौल एएसपी सोतीगंज के बिलाल मर्डर केस में आरिफ के भतीजे सलमान का नाम आया था, लेकिन आरिफ ने अपने प्रभाव से उसका सरेंडर करा दिया था। सलमान अब जेल में है उसे गाजियाबाद जेल में शिफ्ट किया जा चुका है। चौथ वसूली को लेकर भी दोनों पक्षों में तनातनी की बात आ रही है।