सहारनपुर। नगर निकायों का कोई भी अधिकारी या लिपिक पहली बार चुनकर आए पार्षदों या सभासदों को नया समझकर गुमराह नहीं कर सकेगा। क्योंकि शासन ने पहली बार चुनकर आए उक्त जन प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था कर दी है। जिसमें पार्षदों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों की जानकारी दी जाएगी। नगर निगम में कुल 70 पार्षदों में से ऐसे 62 पार्षद हैं, जो यह प्रशिक्षण पाएंगे।
शासन का मानना है कि नए नगर निकायों या विस्तारित निकायों में पहली बार चुनकर आने वाले जन प्रतिनिधियों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों की पूरी समझ नहीं रहती है, जिसकी वजह से वह जनता की बात या समस्याओं को सही प्लेटफॉर्म पर नहीं रख पाते हैं। इसकी वजह से एक ओर जहां उनको अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं वही जन समस्याएं बनी रहतीं हैं। ऐसे में नगर विकास विभाग ने प्रशिक्षण दिलाने का निर्णय लिया है, जिसकी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।
उक्त जन प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी क्षेत्रीय नगर एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र यानी आरसीयूईएस को दी गई है। प्रशिक्षण में जन प्रतिनिधियों को अधिनियम में निहित अधिकारों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही अधिनियम के मुताबिक जनता के प्रति उनके कर्तव्यों के बारे में भी बताया जाएगा।
- पहली बार चुने गए पार्षदों की बात
- वार्ड सात से पहली बार चुनी गई पार्षद अल्पना सिंह का कहना है कि यदि व्यक्ति को अपने अधिकार और कर्तव्यों का ही नहीं पता होगा तो वह कुछ नहीं कर सकता। ऐसे में पार्षदों को प्रशिक्षित किए जाना अच्छा कदम है।
- वार्ड 30 मदनपुरी के पार्षद नीरज शर्मा ने बताया कि यह सच है कि पहली बार पार्षद बने ज्यादातर सदस्यों को अपने अधिकारों की जानकारी नहीं है। यदि प्रशिक्षण दिया जाता है तो यह पार्षदों के साथ ही जनता के लिए भी अच्छा होगा।
- वार्ड 40 गुरुद्वारा रोड के पार्षद राजेंद्र सिंह कोहली का कहना है कि बोर्ड का गठन हुए आठ माह बीत चुके हैं, लेकिन अब भी इतनी देर नहीं हुई है। यदि नगर विकास विभाग प्रशिक्षण कराना चाहता है तो वह जरूर शामिल होंगे।
- वार्ड 24 गोविंद नगर के पार्षद राजीव वर्मा ने बताया कि पार्षदों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों का पता होना चाहिए। अनेक पार्षदों को सच में इसकी जानकारी नहीं है। ऐसे में शासन को जल्द ही प्रशिक्षण कराना चाहिए।