बच्चों को देखा तो भर आईं आंखें...खूब किया दुलार डॉक्टर और स्टाफ 21 दिन बाद आए घर तो बच्चों से लिपट गए, परिजनों से लिया आशीर्वाद मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदारों ने फूल मालाओं से किया स्वागत
मेरठ। बच्चों से 21 दिन तक दूर रहीं। 5 साल का बेटा अभिनव और 8 साल की बेटी माही। पति अमित ने उनकी देखभाल की। बहुत याद आती थी मगर मजबूर थी। आज घर लौटी और बच्चों को देखा तो भावनाओं पर काबू नहीं कर पाई। दोनों बच्चों को गले लगा लिया। आंखें नम हो गई। खूब प्यार किया। दोनों बच्चे भी मम्मी मम्मी कह कर लिपट गए। यह कहानी है स्टाफ नर्स वर्षा की। कक्षा 8 की रहने वाली है। शास्त्री नगर में अपने परिवार के साथ रहती हैं। पति वह पहली उस टीम में शामिल थी जिन्होंने कोरोनावायरस से संक्रमित मरीज़ों का इलाज किया। 7 दिन तक इलाज किया, इसके बाद 14 दिन के लिए ने कोरेंटिन कर दिया गया। शुक्रवार को इनका कोरेंटिन पीरियड पूरा हुआ है। अब एक सप्ताह की छुट्टी मिली है । यह परिवार के साथ बिताएंगे। इसके बाद फिर से इन्हें ड्यूटी ज्वाइन करनी है। वहीं, बिजनौर की रहने वाली स्टाफ नर्स शिखा की 5 साल की बेटी है। 21 दिन हो गए। अभी तक बेटी से मिल नहीं पाई। क्वॉरेंटाइन पीरियड भी इनका पूरा हुआ है। लेकिन लोक डाउन की वजह से से मिल नहीं सकती। बच्ची बिजनौर में परिजनों के पास है। यह बताते हुए कहती हैं कि बेटी की बहुत याद आती है। उम्मीद कर रही हैं कि जल्दी लोक डाउन खत्म होगा और बेटी से मिल पाएंगी। जिन चिकित्सकों और स्टाफ का 14 दिन का क्वारन्टीन पूरा हुआ है, उनमें डॉ धीरेंद्र प्रताप सिंह, डॉ अनिरुद्ध गुप्ता, डॉक्टर मनोज चौधरी, डॉक्टर पंकज, स्टाफ नर्स शिखा, खुशबू, विक्टोरिया, महिमा, वर्षा, अंगद, रूपकिशोर, अशोक, मयंक, सनी, रामबाबू, गंभीर सिंह, अशोक सिंह, डॉक्टर विनय, डॉ शिवम, डॉ ऋषभ तोमर और रविकांत हैं। प्रिंसिपल डॉक्टर आरसी गुप्ता, डॉक्टर सुभाष, डॉ धीरज राज ने इन चिकित्सकों और स्टाफ का फूल मालाएं पहनाकर स्वागत किया। ------- चिकित्सकों और स्टाफ समेत 21 की हुई जांच, रिपोर्ट आई नेगेटिव अपनी जान को जोखिम में डालकर मरीजों का इलाज कर रहे 21 चिकित्सक-स्टाफ की रिपोर्ट नेगिटिव आई है। उनकी हिम्मत और हौसले से कोरोना भी उनसे दूर ही रहा। इन सभी को 14 दिन के लिए एक निजी होटल में क्वारन्टीन के लिए भेजा गया था। शुक्रवार को रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद इन सबको घर भेज दिया गया। ----- दूसरी टीम ने शुरू किया इलाज अब दूसरी टीम मरीजों का इलाज करेगी। सात दिन बाद यह टीम भी क्वारन्टीन हो जाएगी 14 दिन के लिए। इसी तरह रोस्टर बना हुआ है जिसमें 7 दिन तक चिकित्सक और स्टाफ की ड्यूटी रहती है इसके बाद दूसरी टीम इसी तरह 7 दिन तक उनका इलाज करती है। इस टीम ने इलाज शुरू कर दिया है। --- एक टीम की छुट्टी तो दूसरी 14 दिन के क्वारन्टीन के लिए रवाना जिन 16 चिकित्सक और स्टाफ का 7 दिन का समय पूरा हो गया है, उन्हें भी शुक्रवार को 14 दिन के कोरेंटिन के।लिए होटल में भेज दिया गया। इन 14 दिनों में भी स्वास्थ्य विभाग इनकी निगरानी करेगा। इनसे पूछता रहेगा। अगर इनमें कोई लक्षण नजर आता है तो फिर से इनकी कोरोना की जांच कराई जाएगी।