मेरठ। राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 में जिले के छह गांवों ने स्वच्छता, कूड़ा निस्तारण, घर-घर से कूड़ा कलेक्शन, गीले कूड़े से वर्मी कंपोस्ट में पास होकर राज्य स्तरीय परीक्षा में सफलता हासिल कर ली है। अब दो अक्तूबर से पहले केंद्रीय स्तर से आने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण परिणाम की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं। भारत के स्वच्छ गांवों में शामिल होने पर जहां जिला प्रशासन और ग्राम प्रधान को प्रशस्ति पत्र मिलेंगे, वहीं विकास के लिए अतिरिक्त बजट भी मिलेगा।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार ने शहर ही नहीं बल्कि हर गांव को भी स्वच्छ बनाने की योजना संचालित की हुई है। गांवों में भी घर-घर से गीला और सूखा कूड़ा लेने, कूड़े से वर्मी कंपोस्ट तैयार करके अथवा अन्य तरीके से कूड़े का निस्तारण करने, प्रतिदिन गांवों की गली मोहल्लों की सफाई होने, हर घर में और सामुदायिक व सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किए जाने के लिए सरकार ने खजाना खोला हुआ है। जिला प्रशासन की रिपोर्ट की बात करें तो जिले के 15 ग्राम पंचायतों के सबसे स्वच्छ होने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, जिनमें से खरखौदा ब्लॉक के कैली, मेरठ के मोहिउददीनपुर, सरधना के कुशावली, दौराला के सिवाया, रोहटा के पूठखास, जानी के खानपुर को राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत जिले के सबसे स्वच्छ शहरों की सूची में शामिल किया गया है। जिला पंचायती राज अधिकारी रेणु श्रीवास्तव का कहना है कि राज्य स्तरीय स्वच्छता सर्वेक्षण रिपोर्ट में सफलता के बाद अब केंद्रीय स्तर की परीक्षा में सफलता की उम्मीद बढ़ गई है।